सद्गुरु ने चीन से क्या गुहार लगाई?
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नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने कैलाश यात्रा से लौट रहे कई तीर्थयात्रियों को संकट में डाल दिया है। इनपुट के अनुसार, ईशा फाउंडेशन के 80 तीर्थयात्री तिब्बत के ग्रयिरोंग इलाके में लापता हैं। इनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल हैं। उनके साथ तीन स्वयंसेवक और एक डॉक्टर भी थे। तीर्थयात्री बाढ़ आने के समय एक इमिग्रेशन केंद्र में मौजूद थे। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने इस घटना का जिक्र करते हुए भावुक होकर चीन के अधिकारियों से ग्रयिरोंग जाने की अनुमति मांगी है।
बाढ़ के समय तीर्थयात्री कहां मौजूद थे?
ईशा फाउंडेशन के अनुसार, कैलाश यात्रा से लौट रहा समूह ग्रयिरोंग के इमिग्रेशन केंद्र में था। अचानक आई बाढ़ का पानी इमारत में घुस गया और वहां मौजूद लोगों का संपर्क टूट गया। समूह के नेता इशांगा प्रवीण ने सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर सुरक्षित पहुंचने की जानकारी दी थी। इसके कुछ ही मिनट बाद सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर आपदा आने की बात सामने आई है। इसके बाद प्रवीण का मोबाइल फोन दोबारा सक्रिय नहीं हुआ। इससे आशंका जताई जा रही है कि समूह उस समय इमारत के भीतर ही था।
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ग्रयिरोंग तक पहुंचना इतना मुश्किल क्यों है?
बाढ़ के बाद इलाके में रास्ते और संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मलबे के कारण सामान्य संचार और आवाजाही के रास्ते बंद बताए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में लापता तीर्थयात्रियों तक पहुंचना और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया है। इनपुट के अनुसार, ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधि भारत, चीन और दूसरे देशों के राजनयिक अधिकारियों के संपर्क में हैं। वे विशेष अनुमति हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि राहत और खोज अभियान में मदद की जा सके।
सद्गुरु खुद घटनास्थल पर क्यों जाना चाहते हैं?
सद्गुरु ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह खुद एक छोटी टीम के साथ ग्रयिरोंग के प्रभावित इलाके में जाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य लापता तीर्थयात्रियों की तलाश में मदद करना और उनके परिवारों को जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करना है। उनके अनुसार, परिवारों को अब तक अपने परिजनों के बारे में आगे की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने भारत और चीन के अधिकारियों से घटनास्थल तक पहुंचने का अवसर देने की अपील की है।
क्या यह सिर्फ 80 तीर्थयात्रियों की त्रासदी है?
यह घटना हिमालयी क्षेत्र में आई बड़ी प्राकृतिक आपदा के बीच हुई है। इनपुट के अनुसार, नेपाल और तिब्बत की सीमा से जुड़े इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। बर्फीले इलाके में बर्फ के बड़े हिस्से के टूटने या ग्लेशियर से अचानक पानी निकलने जैसी घटनाओं को बाढ़ की संभावित वजहों से जोड़ा गया है। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी और बड़े पत्थर भी लेकर आया, जिससे नुकसान और बढ़ गया।
अब राहत और खोज अभियान की चुनौती क्या है?
प्रभावित पहाड़ी इलाकों में राहत और खोज अभियान कठिन परिस्थितियों में चल रहा है। गहरी मिट्टी, मलबे और खराब रास्तों के कारण बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर, संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने से लापता लोगों के बारे में सही जानकारी जुटाना भी मुश्किल बना हुआ है। सद्गुरु का कहना है कि वह व्यक्तिगत रूप से प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर खोज और राहत प्रयासों में सहयोग करना चाहते हैं। फिलहाल विशेष अनुमति मिलने और प्रभावित इलाके तक पहुंच बनाने की कोशिश जारी है।