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Nepal Election: नेपाल के आम चुनाव में इस बार क्यों हो रही है छोटे दलों की बड़ी चर्चा?

Tue, 25 Oct 2022 03:08 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

Nepal Election: नेपाल में संसदीय और सात प्रांतीय असेंबलियों की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर अगले 20 नवंबर को मतदान होगा। ऐसी कुल 165 संसदीय और 330 प्रांतीय सीटें हैं। इन सीटों पर कुल 2,412 उम्मीदवार मैदान में हैं। कुल 62 पार्टियों ने अपने प्रत्याशी इन चुनावों में खड़े किए हैं...
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nepal election - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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इस बार के आम चुनाव में नई उभरती राजनीतिक पार्टियों की जैसी चर्चा है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसका एक कारण बड़े दलों के अवसरवाद के कारण उनमें लोगों का घटा भरोसा भी है।

नेपाल में संसदीय और सात प्रांतीय असेंबलियों की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर अगले 20 नवंबर को मतदान होगा। ऐसी कुल 165 संसदीय और 330 प्रांतीय सीटें हैं। इन सीटों पर कुल 2,412 उम्मीदवार मैदान में हैं। कुल 62 पार्टियों ने अपने प्रत्याशी इन चुनावों में खड़े किए हैं। कई छोटी पार्टियों ने दावा किया है कि वे मतदाताओं के सामने ऐसा एजेंडा पेश कर रही हैं, जिनकी बड़ी पार्टियों ने उपेक्षा की है। कई छोटे दलों ने दावा किया है कि अगर वे जीते, तो संविधान पर प्रभावी ढंग से अमल को सुनिश्चित कराने में वे बड़ी भूमिका निभाएंगे।

एक ऐसा ही दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी है, जिसके नेता गणेश कारकी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि उनकी पार्टी संविधान से मिले मौलिक अधिकारों पर उचित अमल सुनिश्चित कराएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र और प्रांतों के अधिकारों के स्पष्ट निर्धारण के लिए संविधान में संशोधन कराएगी। ये पार्टी लोकप्रिय टेलीविजन स्टार राबी लेमिछाने ने बनाई है और उसने इन चुनावों में इतना समर्थन पाने को अपना लक्ष्य घोषित किया है, जिससे उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाए। यह सिर्फ संसदीय सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

उधर साझा पार्टी नेपाल संसद की एक और प्रांतीय असेंबलियों की 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी के नेता मिलन पांडेय ने कहा है कि उनका लक्ष्य संघीय व्यवस्था को पुख्ता बनाना है। उन्होंने कहा है कि अगर संघीय व्यवस्था फेल हुई, तो संविधान ही नाकाम हो जाएगा। पार्टी के उम्मीदवार प्रांतों को ज्यादा अधिकार दिलाने के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं।

सीके राउत के नेतृत्व वाली जनमत पार्टी ने नागरिकता से जुड़े मसलों को हल करना अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी के महासचिव चंदन सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार खत्म करने और किसानों को अधिक सब्सिडी दिलवाने के वादे के साथ मैदान में उतरी है। जनमत पार्टी की स्थापना पूर्व चरमपंथी नेता सीके राउत ने मार्च 2019 में की थी। तब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ हुए 11 सूत्री शांति समझौते के तहत संसदीय मार्ग पर चलने का एलान किया था।

विवेकशील साझा पार्टी की नेता समीक्षय बासकोटा ने कहा है कि उनकी पार्टी विदेशों में रहने वाले नेपालियों को मताधिकार दिलाने के वादे पर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा है कि नेपाल को टेक्नोलॉजी, पनबिजली, कृषि और पर्यटन पर खास जोर देकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहिए और यही उनकी पार्टी का एजेंडा है।

संसदीय चुनाव के लिए सबसे ज्यादा उम्मीदवार केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने उतारे हैं। उसके उम्मीदवार 141 सीटों पर लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने 140 प्रत्य़ाशी खड़े किए हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 131 और नेपाली कांग्रेस ने 91 उम्मीदवार उतारे हैं।

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