Chinese Speaker Li Zhanshu in Nepal with K.P. Sharma Oli
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नेपाल यात्रा पर आए चीन की संसद- नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के स्पीकर ली झानझु ने नेपाल के कम्युनिस्ट नेताओं से अपनी बातचीत के दौरान कम्युनिस्ट पार्टियों की एकता की संभावना के बारे में जानकारी ली। इस बात की पुष्टि उनसे मिले कम्युनिस्ट नेताओं से जुड़े सूत्रों ने की है। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या ली ने कम्युनिस्ट नेताओं पर अगले आम चुनाव के लिए आपसी गठबंधन बनाने के लिए कोई दबाव डाला।
नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के एक नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘ऐसा लगा कि ली नेपाल में वामपंथी दलों की मौजूदा सोच के बारे जानना चाह रहे थे।’ कम्युनिस्ट नेताओं के साथ बातचीत के दौरान ली ने अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से नेपाल के हुए करार के बारे में भी जानकारी ली। एमसीसी ने नेपाल ने 50 करोड़ डॉलर की सहायता दी है।
लेकिन इस बारे में हुए करार पर देश में तीखा विवाद देखने को मिला था। चीन के एतराज के बावजूद प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने खास पहल कर एमसीसी करार से संबंधित विधेयक को संसद की मंजूरी दिलाई थी। ली ने अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) पर नेपाल के रुख पर भी बातचीत की। नेपाल सरकार ने पिछले जुलाई में इस प्रोग्राम में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
माओइस्ट सेंटर के नेता ने कहा- ‘वामपंथी एकता के अलावा ली एमसीसी को लेकर भी चिंतित नजर आए।’ दूसरे कम्युनिस्ट नेताओं ने बताया है कि ली ने अगले 20 नवंबर को नेपाल में होने वाले आम चुनाव और उसके संभावित नतीजों को लेकर अपनी सोच उन्हें बताई।
विदेश नीति विशेषज्ञ शंभूराम शिमखड़ा ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘एमसीसी और एसपीपी के बारे में ली की दिलचस्पी चीन की इस आशंका का संकेत है कि भविष्य में नेपाल पश्चिमी खेमे में शामिल हो सकता है। इसीलिए चीन की इच्छा होगी कि नेपाल में एक मजबूत और एकजुट कम्युनिस्ट मोर्चा रहे, जो पश्चिम की तरफ नेपाल के ऐसे किसी झुकाव को रोक सके। चीनी स्पीकर की यात्रा दरअसल ऐसी ही सोच का हिस्सा है।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसी मकसद से हाल में चीनी नेताओं ने लगातार नेपाल की यात्रा की है। जुलाई में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संपर्क विभाग के प्रमुख लिउ जियानचाओ नेपाल आए थे। उनकी भी यहां कम्युनिस्ट नेताओं पुष्प कमल दहल और केपी शर्मा ओली से मुलाकात हुई थी। उन्होंने दोनों नेताओं से आम चुनाव के लिए फिर से वामपंथी गठबंधन बनाने की संभावना के बारे में बार-बार पूछा था।
ली की यहां प्रधानमंत्री देउबा और विदेश मंत्री नारायण खड़का से भी बातचीत हुई है। देउबा से मुलाकात के बाद जारी नेपाल के बयान में कहा गया- ‘चीनी पक्ष ने नेपाल सकार के वन चाइना पॉलिसी के लिए वचनबद्ध रहने और यह वादा करने के लिए तारीफ की कि नेपाल अपनी जमीन का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा।’ देउबा के करीबी सूत्र ने नेपाली मीडिया को बताया है कि ली ने एसपीपी के बारे में नेपाल सरकार के ‘सिद्धांत आधारित’ रुख की भी तारीफ की।