चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने जिन उम्मीदों को लेकर नेपाल यात्रा की, वे पूरी नहीं हुई हैं। इस बात के संकेत वांग की यात्रा के बाद चीन और नेपाल की तरफ से जारी बयानों से मिले हैं। दोनों पक्षों ने जो कहा, उसमें साफ अंतर देखने को मिला है। चीन के विदेश मंत्रालय ने वांग की यात्रा के बारे में शनिवार को एक बयान जारी किया था। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को अपना बयान जारी किया।
काठमांडू में वांग की सत्ताधारी गठबंधन की एक प्रमुख पार्टी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के प्रतिनिधिमंडल से भी वार्ता हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे एक नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट को बताया- ‘चीनी विदेश मंत्री ने नेपाल के अमेरिका के साथ बढ़ते रिश्तों पर परोक्ष रूप से चिंता जताई।’ माओइस्ट सेंटर के वरिष्ठ नेता नारायण काजी श्रेष्ठ ने पत्रकारों को बताया- ‘हमने चीनी विदेश मंत्री से कहा कि हम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं।’
विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) का एक दल भी वांग से मिला। पार्टी के विदेश नीति संबंधी विभाग के प्रमुख राजन भट्टराई ने कहा- ‘किसी भू-राजनीतिक विषय पर हमारी चीनी विदेश मंत्री से बातचीत नहीं हुई। हमने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर अमल, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, सीमा पर व्यापार फिर शुरू करने, और कोविड महामारी आने के बाद से चीन में फंसे नेपाली छात्रों का मसला उनके सामने उठाया।’
इन दोनों बैठकों से यह साफ है कि चीनी दल ने बीआरआई पर अमल को खास तरजीह दी। लेकिन वांग की यात्रा के दौरान नेपाल सरकार के साथ जिन समझौतों पर दस्तखत हुए, उनमें एक भी बीआरआई से संबंधित नहीं है। इसके बावजूद चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया- ‘पिछले कुछ वर्षों के दौरान दोनों देशों ने बीआरआई के तहत निर्माण की दिशा में संतोषजनक प्रगति की है। यह परियोजना नेपाल के राष्ट्रीय निर्माण में बेहद सहायक है।’