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नेपाल: सफल नहीं हुआ चीनी विदेश मंत्री का एजेंडा, दोनों पक्षों के मतभेद हुए जाहिर

Mon, 28 Mar 2022 04:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि नेपाली विदेश मंत्रालय के बयान में बीआरआई का कोई जिक्र नहीं हुआ। उसमें यह भी नहीं कहा गया कि इस परियोजना पर अमल के लिए नेपाल वचनबद्ध है। इस बारे में पूछे जाने पर नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मीडिया से कहा- ‘जिन मुद्दों पर बातचीत हुई, उनका हमारे विस्तृत बयान में जिक्र है।’
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से मुलाकात की - फोटो : MoFANepal
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विस्तार
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने जिन उम्मीदों को लेकर नेपाल यात्रा की, वे पूरी नहीं हुई हैं। इस बात के संकेत वांग की यात्रा के बाद चीन और नेपाल की तरफ से जारी बयानों से मिले हैं। दोनों पक्षों ने जो कहा, उसमें साफ अंतर देखने को मिला है। चीन के विदेश मंत्रालय ने वांग की यात्रा के बारे में शनिवार को एक बयान जारी किया था। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को अपना बयान जारी किया।

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संकेत यह है कि अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने का नेपाल सरकार का फैसला चीन और ऩेपाल के बीच चर्चा के दौरान एक विवादित मसला बन कर उभरा। जब एमसीसी से हुए करार का संसदीय अनुमोदन कराने के मुद्दे पर अमेरिका ने नेपाल को धमकी दी थी, तब भी चीन इस मामले में कूदा था। उसने अमेरिका की ‘जोर-जबर्दस्ती की कूटनीति’ की आलोचना की थी।

बीआरआई को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नेपाल

काठमांडू में वांग की सत्ताधारी गठबंधन की एक प्रमुख पार्टी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के प्रतिनिधिमंडल से भी वार्ता हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे एक नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट को बताया- ‘चीनी विदेश मंत्री ने नेपाल के अमेरिका के साथ बढ़ते रिश्तों पर परोक्ष रूप से चिंता जताई।’ माओइस्ट सेंटर के वरिष्ठ नेता नारायण काजी श्रेष्ठ ने पत्रकारों को बताया- ‘हमने चीनी विदेश मंत्री से कहा कि हम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं।’

विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) का एक दल भी वांग से मिला। पार्टी के विदेश नीति संबंधी विभाग के प्रमुख राजन भट्टराई ने कहा- ‘किसी भू-राजनीतिक विषय पर हमारी चीनी विदेश मंत्री से बातचीत नहीं हुई। हमने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर अमल, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, सीमा पर व्यापार फिर शुरू करने, और कोविड महामारी आने के बाद से चीन में फंसे नेपाली छात्रों का मसला उनके सामने उठाया।’

लेकिन बीआरआई का समझौतों में जिक्र नहीं

इन दोनों बैठकों से यह साफ है कि चीनी दल ने बीआरआई पर अमल को खास तरजीह दी। लेकिन वांग की यात्रा के दौरान नेपाल सरकार के साथ जिन समझौतों पर दस्तखत हुए, उनमें एक भी बीआरआई से संबंधित नहीं है। इसके बावजूद चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया- ‘पिछले कुछ वर्षों के दौरान दोनों देशों ने बीआरआई के तहत निर्माण की दिशा में संतोषजनक प्रगति की है। यह परियोजना नेपाल के राष्ट्रीय निर्माण में बेहद सहायक है।’

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लेकिन पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि नेपाली विदेश मंत्रालय के बयान में बीआरआई का कोई जिक्र नहीं हुआ। उसमें यह भी नहीं कहा गया कि इस परियोजना पर अमल के लिए नेपाल वचनबद्ध है। इस बारे में पूछे जाने पर नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मीडिया से कहा- ‘जिन मुद्दों पर बातचीत हुई, उनका हमारे विस्तृत बयान में जिक्र है।’ नेपाल के बीआरआई में शामिल होने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता 2017 में हुआ था।

नेपाल ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और वांग के बीच हुई वार्ता का विवरण जारी नहीं किया है। लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि चीन स्वतंत्र घरेलू और विदेश नीति अपनाने के नेपाल के प्रयासों का समर्थन करता है। पर्यवेक्षकों ने बयानों में इस अंतर को महत्त्वपूर्ण माना है। इसे इस बात का संकेत समझा गया है कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता चीन की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही।

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