नेपाल के राजनीतिक हलकों में ये आम राय है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की नेपाल यात्रा का मकसद राजनीतिक है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश संपर्क विभाग के प्रमुख लिउ जियानचाओ के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल रविवार को यहां पहुंच रहा है।
नेपाली मीडिया में छपी रिपोर्टों में ध्यान दिलाया गया है कि हाल के महीनों में नेपाल सरकार की विदेश नीति अमेरिका की तरफ झुकी है। इन महीनों में अमेरिका के कई उच्चस्तरीय दलों ने नेपाल की यात्रा की है। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा इसी महीने अमेरिका जाने वाले हैं। बताया जाता है कि नेपाल की विदेश नीति में इस बदलाव के प्रति चीन की आपत्तियों को जिस तरह देउबा सरकार ने नजरअंदाज किया, उससे चीन चिंतित है।
सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस के साथ अपने संबंधों को और प्रगाढ़ करने की इच्छुक है। चीन का यह आकलन है कि अगर नेपाल की दो कम्युनिस्ट पार्टियों- माओइस्ट सेंटर और यूएमएल में एकता नहीं हुई, तो अगले आम चुनाव में नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी। तब वह पांच साल के लिए शासन में आ जाएगी। उस हाल में चीन को नेपाली कांग्रेस और उसकी सरकार से उसे डील करना होगा। इसलिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने अभी से नेपाली कांग्रेस से संबंध बढ़ाने की रणनीति बनाई है।
नेपाल सरकार के एक अधिकारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा कि चीनी दल की यात्रा से नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का की चीन यात्रा का रास्ता खुलेगा। ये यात्रा लंबे समय से लटकी हुई है। उधर राजनीतिक सूत्रों ने राय जताई है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतिनिधिमंडल अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान नेपाल की अन्य पार्टियों से भी संबंध बढ़ाने की कोशिश करेगा। चीन के महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं पर काम तेज करने पर सहमति बनाना और अगले आम चुनाव के बाद उभरने वाली सूरत का जायजा लेना भी इस दल का मकसद है।
माओइस्ट सेंटर के उपाध्यक्ष राम कारकी के मुताबिक चीन इस सवाल को लेकर चिंतित है कि क्या नेपाल ने गुटनिरपेक्षता की नीति छोड़ दी है और वह पश्चिम की तरफ झुक गया है। उन्होंने कहा कि जहां तक नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियो की एकता का सवाल है, तो चीन की उसमें दिलचस्पी है। लेकिन यह हमें देखना है कि हमारे लिए ये जरूरी है या नहीं। मुझे नहीं लगता कि चीन इतना प्रभावशाली है, जिससे वह नेपाल में कम्युनिस्ट समूहों को एकजुट कर दे।
काठमांडू स्थित थिंक टैंक चीन स्टडी सेंटर के कार्यवाहक अध्यक्ष सुंदर नाथ भट्टराई ने काठमांडू पोस्ट से बातचीत में कहा कि चीन नेपाल में वामपंथी एकता चाहता है। इससे उसके लिए यहां काम करना आसान हो जाएगा। वह इस बात को लेकर चिंतित है कि यूक्रेन युद्ध के बाद से नेपाल पश्चिम की तरफ झुक गया है, लेकिन चीन-नेपाल संबंधों के विशेषज्ञों की राय है कि एक यात्रा से चीन अपने सभी मकसद हासिल कर लेगा, यह मुमकिन नहीं है। लेकिन इस यात्रा से उसे नेपाल की जमीनी हालात से परिचित होने में मदद जरूर मिलेगी।