बोरिस जॉनसन के प्रधानमंत्री पद छोड़ने का एलान करने से कंजरवेटिव पार्टी के हलकों में आम तौर पर राहत महसूस की गई है। उनमें ये उम्मीद जगी है कि जॉनसन के कमजोर नेतृत्व के कारण पार्टी जिन समस्याओं में उलझ गई, अगला नेता उसे उनसे उबारने में सफल रहेगा। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने पार्टी का मूड भांपने के लिए अलग-अलग स्तरों के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उनसे यह तस्वीर उभरी कि जॉनसन ने प्रधानमंत्री रहते हुए जिस तरह व्यवहार किया, उससे पार्टी के अंदर उनको लेकर गहरा विरोध पनप गया था।
कंजरवेटिव पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि जॉनसन ही समस्या थे। अब वे जा रहे हैं, तो हम अपने समझदार नेताओं से उम्मीद जोड़ सकते हैं। पार्टी नेताओं में यह राय भी है कि नया नेता चुनने का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। एक राय यह भी उभरी है कि 2019 के आम चुनाव के समय पार्टी को जॉनसन जैसे नेता की ही जरूरत थी, जो भावनात्मक राजनीति करने में सक्षम हो। लेकिन सस्ती लोकप्रियता की वैसी राजनीति अब कारगर नहीं है।
जॉनसन की हैसियत अब कार्यवाहक प्रधानमंत्री की हो गई है। उनकी जगह नए नेता के रूप में कम से कम 11 नामों पर यहां चर्चा चल रही है। हालांकि यह मोटी राय बनी है कि मुख्य मुकाबला ऋषि सुनक, साजिद जाविद, लिज ट्रुस, पेनी मॉर्डॉन्ट और बेन वॉलास के बीच है। वैसे नदीम जहावी को भी एक मजबूत दावेदार बताया जा रहा है।
कंजरवेटिव पार्टी के कट्टरपंथी धड़े की राय है कि विचारधारा के प्रति आस्थावान व्यक्ति को ही अगला नेता चुना जाना चाहिए। इस धड़े की राय है कि जॉनसन की जीवनशैली कंजरवेटिव सोच के अनुरूप नहीं थी। उधर पार्टी के लिबरल खेमे की राय है कि अगला नेता स्वच्छ छवि का होना चाहिए। इस धड़े की राय में जॉनसन के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही थी कि उनका निजी जीवन दागदार था।
सीएनएन से बातचीत में जॉनसन के वफादार नेताओं ने निवर्तमान प्रधानमंत्री से हुए व्यवहार को लेकर गुस्से का इजहार किया। इस खेमे के नेता मानते हैं कि जॉनसन दिग्गज कद के नेता हैं, जिनसे छोटे कद के ईर्ष्यालु नेताओं ने धोखा किया। इस खेमे का दावा है कि आज भी वोट खींचने की जितनी क्षमता जॉनसन में है, उतनी पार्टी के किसी और नेता में नहीं है।
वैसे कंजरवेटिव पार्टी में अब आम तौर आशावादी नजरिया है। नेताओं को उम्मीद है कि जॉनसन के दौरान जारी विवादों से पार्टी को छुटकारा मिलेगा, जिससे वह शासन के कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाएगी।
कंजरवेटिव पार्टी 12 साल से लगातार सत्ता में है। इस दौरान पार्टी के कई रूप ब्रिटेन को देखने को मिले हैँ। पूर्व प्रधानमंत्रियों डेविड कैमरॉन और टेरिजा मे ने आम तौर पर पार्टी को मध्यमार्ग पर ले जाने की कोशिश की। जॉनसन ने दक्षिणपंथ की वकालत की। उन्होंने ब्रेग्जिट को सफलता से अंजाम दिया। लेकिन इस दौरान ब्रिटेन आर्थिक और कूटनीतिक समस्याओं से उलझ गया। क्या अगला नेता उन समस्याओं से देश को निकालने में सक्षम होगा, यह इस वक्त ब्रिटेन में यही असल सवाल है।