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Nepal: काठमांडू में कौतूहल बनी ‘टेक्स्ट बुक फ्री फ्राइडे’ योजना, बिना किताबों और बस्ते के स्कूल आएंगे बच्चे

Fri, 28 Apr 2023 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

शिक्षाशास्त्रियों ने कहा है कि योजना को बिना पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किए लागू किया जा रहा है। इसलिए आशंका है कि यह प्रचार का हथकंडा बन कर रह जाए। नगर प्रशासन ने इस प्रयोग के लिए दो करोड़ नेपाली रुपये का बजट मंजूर किया है...
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Nepal: स्कूल बैग टांगे बच्चे - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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नेपाल की राजधानी काठमांडू में ‘टेक्स्टबुक-फ्री फ्राइडे’ का एक नया प्रयोग शुरू किया गया है। शहर के सभी स्कूलों को इस योजना पर अमल करने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल, शहर के 89 में से 56 कम्युनिटी स्कूलों में यह प्रयोग शुरू किया गया है। इसके तहत शुक्रवार को बच्चों को बिना किताबों और स्कूली बस्ते के स्कूल आने को कहा जाएगा। उस दिन स्कूलों में जिंदगी के बुनियादी कौशल सिखाए जाएंगे और पाठ्यक्रम के बाहर की गतिविधियों में उनकी भागीदारी बनाई जाएगी।

यह प्रयोग इसी शुक्रवार से शुरू हो गया। कुछ शिक्षक और अभिभावक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। लेकिन शिक्षाशास्त्रियों ने कहा है कि योजना को बिना पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किए लागू किया जा रहा है। इसलिए आशंका है कि यह प्रचार का हथकंडा बन कर रह जाए। नगर प्रशासन ने इस प्रयोग के लिए दो करोड़ नेपाली रुपये का बजट मंजूर किया है। नगर प्रशासन के शिक्षा विभाग के प्रमुख सीताराम कोइराला ने यह जानकारी दी है।

इस प्रयोग के तहत नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को 10 टॉपिक्स पर अल्पकालिक कोर्स करने का मौका दिया जाएगा। इन टॉपिक्स में खेती, बागवानी, कॉस्मेटिक ट्रेनिंग, कारपेंटरी, नक्काशी, पाक कला, फैशन डिजाइन, वस्त्र सिलाई, इलेक्ट्रिक वायरिंग, आपदा तैयारी, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर, प्लंम्बिंग, और मूर्ति कला शामिल हैं। कोइराला ने कहा- ‘इनमें से हर कोर्स वैकल्पिक है। हर कोर्स की अवधि 90 दिन होगी।’ उन्होंने बताया कि 90 कंपनियों ने छात्रों को ट्रेनिंग देने के लिए अर्जी दी है। प्रशासन उपयुक्त कंपनियों को चुनने के काम में जुटा हुआ है।

काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह ने कहा है कि ट्रेनिंग के लिए कार्यों को चुनते वक्त यह ध्यान रखा गया है कि ऐसे प्रशिक्षण से छात्र घरेलू जरूरतों को पूरा करने के योग्य बनें। उन्होंने कहा- ‘प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में ऐसे कौशल की ट्रेनिंग दी जाती थी। लेकिन हमने पश्चिमी शिक्षा को अपनाया और इस कारण हम कहीं नहीं पहुंच सके हैं।’

आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए भी कई तरह की पाठ्यक्रम से बाहर की गतिविधियां शुरू करने की योजना है। इसके पीछे मकसद मानसिक और शारीरिक विकास होगा। इन छात्रों को लेखन, संगीत, कविता लेखन आदि जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें खेतों की खुदाई, पौधा लगाने, पराली हटाने, कचरे का निपटारा आदि जैसे कार्यों की ट्रेनिंग दी जाएगी।

लेकिन कुछ शिक्षाशास्त्रियों ने कहा है कि वे नगर प्रशासन की इस योजना से खुश नहीं हैं। उनके मुताबिक ऐसी योजना पर तब तक अमल नहीं हो सकता, जब तक स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को इसके लिए तैयार न किया जाए। शिक्षाशास्त्री विनय कुमार कुशियात ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘फिलहाल यह योजना मेयर बालेंद्र शाह का एक पब्लिसिटी स्टंट लगता है। हमारे कम्युनिटी स्कूलों के पास इस योजना को लागू करने की क्षमता नहीं है।’

काठमांडू स्थित दरबार हाई स्कूल के प्रिंसिपल शिवराज अधिकारी ने कहा- ‘हमें इस योजना के बारे में जानकारी दो दिन पहले ही मिली। नगर प्रशासन ने हमसे इसी शुक्रवार से इस पर अमल करने को कह दिया। हम भ्रम में है। हमारे पास ना तो इसकी रूपरेखा है और न ही जरूरी प्रयोगशाला उपलब्ध है।’

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