अमेरिकी समाज में फैलती निराशा के कारण कम उम्र लड़कियों में आत्म-हत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। यह जानकारी अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपने एक सर्वे के आधार पर दी है। इसके मुताबिक 2021 में उन किशोर उम्र लड़कियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ, जिन्होंने या तो खुदकुशी करने के बारे में सोचा या सचमुच इसका प्रयास किया।
सीडीसी ने ध्यान दिलाया है कि 2021 में कोरोना महामारी का काफी असर था, जिसका नौजवानों की दिमागी सेहत पर बहुत खराब प्रभाव पड़ा। लेकिन जानकारों ने इसी सर्वे से सामने आए आंकड़ों के आधार पर ध्यान दिलाया है कि महामारी के पहले भी आत्म-हत्या के बारे में सोचने या उसका प्रयास करने वाली लड़कियों की संख्या काफी ऊंची थी।
सीडीसी के यूथ रिस्क बिहेवियर सर्वे के तहत पाया गया कि नौवीं से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली 30 फीसदी छात्राओं ने 2021 में आत्म-हत्या करने के बारे में गंभीरता सोचा। 2019 में हुए इसी सर्वे में यह आंकड़ा 24.1 फीसदी था। जिन छात्राओं ने खुदकुशी की योजना बनाई, उनकी संख्या 2019 में 19.9 फीसदी थी, जो दो साल बाद 23.6 फीसदी हो गई। जिन छात्राओं ने सचमुच खुदकुशी की कोशिश की, उनकी संख्या 11 से बढ़ कर 13.2 फीसदी हो गई।
सीडीसी हर दो साल पर एक सर्वे करता है, जिनमें नौजवानों से उनकी यौन गतिविधि, मादक पदार्थ सेवन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। 2021 में उसने अपने इस सर्वे का दायरा बढ़ाया। 2019 में जहां इस सर्वे में 13,677 छात्रों को शामिल किया गया था, वहीं 2021 में 17,232 छात्रों को इसमें शामिल किया गया।
न्यूज वेबसाइट द हिल ने अब इस सर्वे से सामने आए आंकड़ों को विस्तार से प्रकाशित किया है। इससे सामने आया है कि 2021 में आम तौर पर युवाओं की मानसिक सेहत बिगड़ी। सर्वे के दौरान 30 फीसदी छात्रों ने कहा कि उनकी दिमागी सेहत खराब है। 40 फीसदी से ज्यादा छात्रों ने कहा कि बीते एक साल से वे लगातार उदासी और निराशा महसूस करते रहे हैं।
छात्रों से एक सवाल यह भी पूछा गया था कि क्या पिछले 12 महीनों में उन्होंने कभी खुदकुशी करने के बारे में गंभीरता से सोचा या इसकी योजना बनाई। साथ ही यह भी पूछा गया कि बीते 12 महीनों में उन्होंने कितनी बार आत्म-हत्या के प्रयास किए। यह सवाल भी उनके सामने रखा गया कि क्या इस कोशिश में उन्हें कोई चोट आई या अधिक जहरीली चीज खा लेने के कारण उन्हें इलाज करवाने की जरूरत पड़ी।
शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस सर्वे से जो नतीजे सामने आए, उनके मुताबिक आत्म-हत्या के बारे में सोचने वाले पुरुष छात्रों की संख्या 2019 और 2021 में लगभग समान रही। लेकिन महिला छात्रों की संख्या में काफी इजाफा देखने को मिला। आत्महत्या की वास्तविक कोशिश करने वाली ऐसी छात्राओं की संख्या भी बढ़ी, जिन्हें इस कोशिश के दौरान पहुंची क्षति के कारण इलाज करवाना पड़ा। आत्महत्या करने के बारे में सोचने वाली सबसे ज्यादा छात्राएं नौ से 11 साल उम्र वर्ग की थीं।