नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी पर पूर्व मंत्री माधव प्रसाद चौलागेन ने कहा कि यदि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत है तो यह सही कदम है, लेकिन बदले की भावना से हुई तो स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने क्या कुछ कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी पर हिमालयी राष्ट्र के पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागेन ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, अभी यह देखना बाकी है कि मामला आगे कैसे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि अगर यह गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है, तो यह स्थिति संभालने का अच्छा तरीका है। लेकिन अगर इसे बदले की भावना के तौर पर देखा गया, तो इससे परेशानी पैदा हो सकती है।
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उन्होंने बताया कि जांच के लिए एक समिति बनाई गई थी। चौलागेन ने कहा कि सरकार को संतुलन बनाए रखना चाहिए, अच्छा शासन सुनिश्चित करना चाहिए और इन मुद्दों पर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार इसे अपना तरीका बनाकर अन्य मामलों में भी इसी तरह काम करती है, तो लोगों को समझ आएगा कि सरकार को इसी तरह काम करना चाहिए।
नेपाल की राजनीति में यह सप्ताह ऐतिहासिक रहा। पिछले साल जेन-जी आंदोलन को कथित तौर पर बलपूर्वक दबाने के एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री ओली को शनिवार सुबह गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद उन्हें काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार थे और उनका पहले कई बार किडनी ट्रांसप्लांट भी हो चुका है।
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पुलिस ने ओली को भक्तपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया और जिला पुलिस रेंज काठमांडू लाया गया। इसके बाद मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नेपाली कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया। सरकार के मुताबिक, यह कार्रवाई एक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।
गिरफ्तारी के पीछे क्या मामला?
जानकारी के मुताबिक, यह मामला पिछले साल हुए जेन-जी विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें 77 लोगों की मौत हुई थी और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। जांच आयोग ने इसे आपराधिक लापरवाही का मामला माना और कार्रवाई की सिफारिश की थी।
क्या जांच रिपोर्ट के बाद ही हुई कार्रवाई?
पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की की अगुवाई वाले आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओली समेत कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की अगुवाई वाली कैबिनेट ने इस रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया। इसी के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर कार्रवाई की।