सिंगापुर की राष्ट्रपति हलीमा याकूब ने युवाओं के कट्टरपंथ का रास्ता अपनाने पर रविवार को चिंता व्यक्त की। उन्होंने झूठी धारणाओं का मुकाबला करने को कहा। याकूब ने कहा कि जनता को यह समझाने की आवश्यकता है कि आईएसआईएस इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
अल्पसंख्यक मलय मुस्लिम समुदाय की नेता याकूब ने कहा, युवा जिज्ञासु और प्रभावशाली होते हैं, इसलिए दुनिया के अन्य हिस्सों की धारणाओं से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं। यहां एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिंगापुर में झूठी धारणाओं (नैरेटिव) का मुकाबला करने और यह समझाने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है कि आईएसआईएस इस्लाम या मुसलमानों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं करता है।
उनकी यह टिप्पणी तब आई है, जब कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने इसी महीने के शुरुआत में आईएसआईएस के ऑनलाइन प्रचार से प्रेरित होने पर दो किशोरों के खिलाफ आंतरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। 'द स्ट्रेट्स टाइम्स' अखबार के मुताबिक, दोनों किशोरों में एक 15 वर्षीय छात्र भी शामिल है, जिसने चाकू से हमला करने और गैर-मुस्लिमों का सिर कलम करने और आत्मघाती हमलावर बनने के बारे में सोचा था।
'टुडे' अखबार ने 68 वर्षीय नेता हलीमा याकूब के हवाले से कहा, दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं को लेकर चिंतित युवाओं को चर्चा करने, सवाल पूछने और क्षेत्र के अनुभवी एवं जानकार विशेषज्ञों से अधिक जानकारी हासिल करने के लिए एक सुरक्षित मंच दिया जाना चाहिए। युवाओं को सोशल मीडिया पर उन झूठी और भ्रामक धारणाओं का मुकाबला करने के लिए सटीक तथ्य और जानकारी प्रदान की जा सकती है जो उन्हें भ्रमित या गुमराह करते हैं।
राष्ट्रपति याकूब ने कहा, कट्टरता के हालिया मामलों ने मुस्लिम समुदाय में चिंताओं को बढ़ा दिया है। उन्हें डर है कि यह गैर-मुसलमानों के साथ उनके संबंधों और उनके रोजगार की संभावनाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।
उन्होंने कहा, व्यक्तिगत रूप से मुझे पूरा भरोसा है कि सिंगापुर के लोग जानते हैं कि यहां मुस्लिम सोचने वाले, तर्कसंगत, शांतिप्रिय लोग हैं जो हमारी अर्थव्यवस्था और समाज में दृढ़ता से योगदान देते हैं। सिंगापुर की 5 लाख से ज्यादा चीनी आबादी में मलय की हिस्सेदारी 15 फीसदी है और बाकी भारतीय और यूरेशियन सहित अन्य हैं।