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अमेरिका ने चीन को फिर घेरा, कोरोना के बहाने भारत की जमीन हथियाना चाहता था ड्रैगन

Tue, 21 Jul 2020 10:09 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, वाशिंगटन
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अमेरिकी संसद - फोटो : iStock
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अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) में संशोधन को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इसमें गलवां घाटी में भारत के खिलाफ चीन की आक्रामकता और दक्षिण चीन सागर जैसे विवादित क्षेत्रों में तथा आसपास में चीन की बढ़ती क्षेत्रीय दबंगई पर निशाना साधा गया है। साथ ही कहा गया है कि चीन कोरोना वायरस की तरफ ध्यान बंटा कर भारत के क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश में था। 

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भारतीय अमेरिकी सांसद एमी बेरा के साथ मिलकर कांग्रेस सदस्य स्टीव शैबेट ने एनडीएए संशोधन सोमवार को पेश किया। इसमें कहा गया है कि भारत और चीन को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तनाव कम करने के लिए काम करना चाहिए।

भारत और चीन की सेना के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास कई इलाकों में पांच मई से गतिरोध जारी है। गलवां घाटी में पिछले महीने हुई हिंसक झड़प के बाद स्थिति बिगड़ गई थी जिसमें 20 भारतीय सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे।
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प्रतिनिधि सभा ने सैकड़ों अन्य संशोधनों के साथ इस संशोधन को भी सर्वसम्मति से पारित किया गया जिसमें कहा गया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा, दक्षिण चीन सागर, सेनकाकु द्वीप जैसे विवादित क्षेत्रों में चीन का विस्तार और आक्रामकता गहरी चिंता के विषय हैं।

द्विपक्षीय संशोधन में भारत-चीन सीमा पर गलवां घाटी में भारत के खिलाफ चीन की आक्रामकता पर विरोध जताया गया है और चीन की बढ़ती क्षेत्रीय दबंगई के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है। इसमें कहा गया कि तीन ने कोरोना वायरस की तरफ ध्यान बंटा कर भारत के क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश के साथ ही दक्षिण चीन सागर में अपना क्षेत्रीय दावा मजबूत करने की कोशिश की है।

चीन 13 लाख वर्ग मील दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे इलाके को अपना संप्रभु क्षेत्र बताता है। चीन क्षेत्र में कृत्रि द्वीपों पर सैन्य अड्डे बना रहा है। इस क्षेत्र पर ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपीन, ताइवान और वियतनाम भी दावा करता है।

भारत और चीन के बीच स्थिति की करीब से निगरानी:अमेरिकी रक्षा मंत्री

उधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने मंगलवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच स्थिति की अमेरिका बहुत करीब से निगरानी कर रहा है। एस्पर ने चीनी सैन्य गतिविधियों को क्षेत्र को अस्थिर करने वाला बताया।

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने पूर्वी लद्दाख और दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य आक्रमकता फिर से बढ़ने के बीच एक सुरक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह कहा। एस्पर ने दोनों देशों के बीच तनाव पर पूछे गये गये एक सवाल के जवाब में कहा कि हम भारत और चीन के बीच स्थिति की, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जो कुछ हो रहा है उसकी बहुत करीब से निगरानी कर रहे हैं और हमें यह देख कर अच्छा लगा कि दोनों पक्ष तनाव घटाने की कोशिश कर रहे हैं। 

उन्होंने क्षेत्र में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों को अस्थिर करने वाला करार देते हुए कहा कि वह पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में अपना आक्रामक व्यवहार जारी रखे हुए है। एस्पर ने यह भी कहा कि भारत के साथ अमेरिका संबंध 21 वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा संबंधों में एक है।

चीन के साथ भारत के सीमा विवाद के बीच परमाणु ऊर्जा से संचालित विमान वाहक पोत यूएसएस निमित्ज के नेतृत्व में अमेरिकी नौसेना के एक हमलावर बेड़े ने अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के तट पर भारतीय युद्ध पोतों के साथ सोमवार को एक सैन्य अभ्यास किया। नई दिल्ली में अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के चार युद्ध पोत ने हिस्सा लिया।

यूएसएस निमित्ज विश्व का सबसे बड़ा युद्ध पोत है। पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों (भारत और अमेरिका) की नौसेनाओं के बीच यह अभ्यास मायने रखता है।

 

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चीनी हैकरों पर कोविड-19 पर शोध करने वाली फर्मों को निशाना बनाने का आरोप 

उधर, अमेरिकी न्याय विभाग ने दो चीनी हैकरों पर दुनियाभर की कंपनियों से व्यापार से जुड़ी करोड़ों डॉलर मूल्य की गुप्त जानकारियों को चुराने और हाल ही में कोरोना वायरस के लिए टीका विकसित करने वाली फर्मों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

अधिकारियों ने कहा कि हाल के महीनों में हैकरों ने वैक्सीन और उपचार विकसित करने के अपने काम के लिए सार्वजनिक रूप से ज्ञात कंपनियों के कंप्यूटर नेटवर्क की कमियों पर शोध किया था।

मामले में हैकर्स के खिलाफ व्यापार से जुड़ी गुप्त जानकारी चोरी करने और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। यह मामला इस महीने की शुरुआत में वाशिंगटन राज्य की संघीय अदालत में दायर किया गया था।

दक्षिण कोरिया में सैनिकों का‘समायोजन करने पर विचार कर रहा है अमेरिका : एस्पर

पेंटागन दक्षिण कोरिया और दुनिया भर में तैनात अपने सैनिकों के समायोजन पर विचार कर रहा है क्योंकि वह पश्चिम एशिया में उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने की वर्षों से चल रही कार्रवाई से अपना ध्यान हटाकर चीन की तरफ कर रहा है। यह जानकारी मंगलवार को रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने दी।

एस्पर ने कहा कि उन्होंने दक्षिण कोरिया से हटने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है। विस्तार से जानकारी दिए बगैर एस्पर ने कहा कि वह अमेरिकी सैनिकों की क्रमवार तैनाती पर ज्यादा जोर दे रहे हैं न कि स्थायी तैनाती पर क्योंकि इससे हमें, अमेरिका को पूरी दुनिया के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला करने में ज्यादा सामरिक लचीलापन मिलता है। 

अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में 28,500 से अधिक सैनिकों की तैनाती कर रखी है ताकि उत्तर कोरिया की चुनौती का जवाब दिया जा सके लेकिन अब अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बीच संधि में तनाव आया है, क्योंकि ट्रम्प प्रशासन अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी के लिए सियोल से काफी ज्यादा भुगतान करने की मांग कर रहा है।
 

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