नाटो अपने चार हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ संबंधों को गहरा करने के लिए तैयार है। चीन की आक्रामकता को देखते हुए और यूक्रेन युद्ध के तीसरे वर्ष में प्रवेश पर अमेरिका ने नाटो को और सशक्त बनाने के लिए एशियाई देशों को प्रमुखता दी है। इनमें न्यूजीलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया व ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, जो लगातार तीसरे वर्ष नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। भारत के साथ भी वह रिश्ते बढ़ा रहा है।
यूरोप और पश्चिमी गोलार्ध से परे गठबंधन की बढ़ती रुचि से चिंतित चीन शिखर सम्मेलन पर करीब से नजर रख रहा है। व्हाइट हाउस ने शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर कहा कि अमेरिका, नाटो गठबंधन और विश्व भर के मित्र देशों के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित कर रहा है। इनमें विशेष रूप से वे देश शामिल हैं जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हैं। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा संचार सलाहकार जॉन किर्बी ने कहा, राष्ट्रपति जानते हैं कि हम सभी के सामने मौजूद वैश्विक खतरे और चुनौतियां एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई हैं। इसीलिए वह चीन से मुकाबले को गठबंधन प्राथमिक मानते हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति ने हमारे नाटो सहयोगियों को भी आपसी रक्षा में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया है। किर्बी ने कहा, 75 वर्षों से नाटो इतिहास का सबसे मजबूत रक्षात्मक गठबंधन है और गत तीन वर्षों में यह पहले कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा है।
अमेरिका में 38 देशों के नेता जुटे
पहले नाटो शिखर सम्मेलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के लिए 38 विभिन्न देशों के नेता वाशिंगटन में एकत्र हुए हैं। इसमें यूक्रेन, जापान, न्यूजीलैंड और कोरिया गणराज्य सहित सभी नाटो सहयोगियों के साथ-साथ नाटो साझेदारों के नेता भी शामिल हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक, नाटो देश इस सप्ताह आधिकारिक तौर पर स्वीडन का भी स्वागत करेंगे। राष्ट्रपति कन्वेंशन सेंटर में गठबंधन के 32 सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।
भारत से बढ़ाए करीबी रिश्ते चीन के अमेरिका पर आरोप
बीजिंग लगातार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आक्रामकता बढ़ा रहा है। इस क्षेत्र में भारत को अमेरिका सबसे अहम देश मानता है और उसे चीन का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है। यही कारण है कि क्वाड गठबंधन और आई2यू2 जैसे गठबंधनों में भारत की भूमिका सबसे प्रमुख रखी गई है। अमेरिका में नाटो बैठक को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने अमेरिका पर अपनी सीमा का उल्लंघन करने, जनादेश का विस्तार करने, अपने रक्षा क्षेत्र से परे पहुंचने और टकराव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
नाटो सदस्यों में सबसे कम योगदान वाला देश कनाडा
अमेरिकी मीडिया संगठन ‘पॉलिटिको’ ने कहा कि कनाडा नाटो सैन्य गठबंधन में सबसे कम योगदान देने वाले देशों में से एक बन गया है। वह घरेलू सैन्य खर्च लक्ष्य पूरे करने में नाकाम रहा, नए उपकरण खरीदने के लिए वित्त पोषण में नाकाम रहा और उसके पास इस संबंध में कोई योजना भी नहीं है। ‘पॉलिटिको’ ने कहा, नाटो के 12 संस्थापक सदस्यों में से एक कनाडा ने रक्षा पर 2% का जीडीपी खर्च करने के संकल्प पर 2014 में हस्ताक्षर किए थे। लेकिन नाटो सदस्यों की इस लक्ष्य को हासिल करने में धीमी प्रगति रही है।