US: नाटो महासचिव मार्क रूटे ने कहा कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल करने के बेहद करीब था और उसे कमजोर करना दुनिया की सुरक्षा के लिए अहम कदम है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध के दौरान यूरोपीय देशों ने अमेरिका का साथ दिया। जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ सहयोगी देशों पर निराशा जताई। पढ़िए रिपोर्ट-
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बैठक में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) महासचिव मार्क रूटे ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे बहुत अहम हैं। उनके मुताबिक, ईरान लगभग परमाणु क्षमता हासिल करने के बहुत करीब था, जो क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता था।
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रुटे ने क्या कहा?
मार्क रूटे ने कहा कि जी-7 के सभी नेताओं ने इस बात की सराहना की है कि ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि छह हफ्तों के इस युद्ध के दौरान यूरोप के ठिकानों से करीब 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमान उड़ान भरते रहे। उन्होंने कहा कि रोमानिया के बुखारेस्ट हवाई अड्डे को भी वाणिज्यिक उड़ानों के लिए बंद करना पड़ा, ताकि सैन्य अभियान जारी रह सके।
रूटे ने कहा कि कुछ अलग-अलग घटनाएं हुई हैं जिनसे निराशा हुई है। लेकिन कुल मिलाकर यूरोपीय सहयोगी अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं।
यूरोपीय देशों के सहयोग के सवाल पर ट्रंप ने क्या कहा?
इस पर जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनके यूरोपीय सहयोगियों ने उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया, तो उन्होंने कहा कि अगर कोई और इस स्थिति में होता तो आज यह बैठक भी नहीं हो रही होती। ट्रंप ने कहा कि यह अच्छा होता, अगर सहयोगी देश मदद की इच्छा जताते। उन्होंने कहा कि अगर वे किसी से मदद मांगते तो वह शायद मदद करने का तरीका निकाल लेते।
उन्होंने कहा कि वह इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से निराश थे। स्पेन को उन्होंने बहुत खराब स्थिति बताया। हालांकि, उन्होंने नाटो महासचिव मार्क रूटे के प्रति सम्मान भी जताया और कहा कि वे आगे चर्चा करेंगे कि क्या हुआ था और आगे क्या होगा। ईरान समझौते में नौवहन पर किसी प्रकार के शुल्क को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि यह उनके लिए स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा किया गया तो इसे अन्य देशों पर भी लागू करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है।