बृहस्पति ग्रह के वातावरण में पानी भूमध्य रेखा के साथ करीब 0.25 फीसदी अणुओं का निर्माण करता है। यह जानकारी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के 2011 में भेजे गए जूनो मिशन से मिले आंकड़ों के अध्ययन से सामने आई है। बृहस्पति पर पानी के वितरण का यह आंकड़ा सूर्य से करीब तीन गुना अधिक है। इस ग्रह पर पानी की भरमार है, लेकिन इसका वितरण पूरी तरह असमान है।
जूनो मिशन के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट मंगलवार को साइंस जर्नल नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित की गई। इस रिपोर्ट ने नासा के 1995 में भेजे गए गैलीलियो मिशन के बाद पहली बार गैस की बहुलता वाले विशालकाय ग्रह पर पानी की भरमार के बारे में जानकारी दी है। अमेरिका में नासा की जेट प्रॉपल्जन लेबोरेटरी समेत विभिन्न शोधकर्ताओं के मुताबिक, बृहस्पति ग्रह सूर्य के मुकाबले बेहद सूखा हो सकता है।
यह तुलना दोनों पर तरल पानी की मौजूदगी पर आधारित नहीं है बल्कि पानी के तत्वों ऑक्सीजन व हाइड्रोजन की मौजूदगी को इसका आधार बनाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बृहस्पति संभवत: सबसे पहला ग्रह था और इसका अधिकतर हिस्सा धूल व गैसों से बना हुआ है, जो सूर्य में शामिल नहीं है।
नासा के वैज्ञानिकों ने एक बयान में कहा, बृहस्पति के निर्माण से जुड़ी मुख्य परिकल्पनाओं के मुताबिक, इस ग्रह का शेष हिस्सा उसके द्वारा सोखे गए पानी की बदौलत बना है। उन्होंने कहा, पानी की बहुत अधिक मौजूदगी का इस विशालकाय गैस पिंड के मौसम विज्ञान और आंतरिक संरचना पर अहम प्रभाव है।