उल्का पिंड पृथ्वी से टकरा कर जीवन खत्म कर सकते हैं, वैज्ञानिकों को यह चिंता हमेशा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक अंतरिक्ष यान लाखों मील दूर एक हानिरहित क्षुद्रग्रह से टकराया और इस दौरान उसकी कक्षा बदलने में सफल रहा। यह जानकारी एजेंसी ने ‘‘सेव द वर्ल्ड’ परीक्षण के नतीजों की घोषणा करते हुए दी। नासा का कहना है कि अंतरिक्ष यान के टकराव ने पृथ्वी को भविष्य के खतरों से बचाने के लिए किए गए परीक्षण में एक क्षुद्रग्रह की कक्षा को बदल दिया यानी अंतरिक्ष यान ने परीक्षण में क्षुद्रग्रह को सफलतापूर्वक विक्षेपित कर दिया। नासा ने अपने तरह का यह पहला प्रयोग दो सप्ताह पहले किया था।
अंतरिक्ष में हजारों किमी में फैले एस्टेरॉयड के टुकड़े
पृथ्वी की तरफ आने वाले उल्कापिंड से पृथ्वी की रक्षा करने के लिए नासा द्वारा पिछले महीने किया गया डार्ट मिशन सफल रहा। इस मिशन के तहत अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के एक अंतरिक्ष यान ने परीक्षण के तहत एक क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) को सफलतापूर्वक टक्कर मारी जिसके बाद एस्टेरॉयड चूर-चूर हो गया। इस मिशन की तस्वीरों को जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरें जारी की गईं। नासा के इस मिशन पर दुनियाभर के अंतरिक्ष विज्ञानियों की नजर थीं। इस परीक्षण से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पृथ्वी की तरफ आने वाले किसी उल्कापिंड को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदली जा सकती है, ताकि धरती की रक्षा हो सके।
मिशन के दौरान पूरे घटनाक्रम और उसके प्रभाव पर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और हबल टेलीस्कोप सहित तमाम कैमरों और टेलीस्कोप से यान पर नजर रखी जा रही थी। पृथ्वी से जुड़ी दूरबीनों द्वारा ली गई छवियों में टक्कर के बाद डिमोर्फोस से बाहर निकलने वाले धूल के एक विशाल बादल को दिखाया गया है। जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को जूम करके देखने पर पता चलता है कि टक्कर के बाद एस्टेरॉयड के टुकड़े अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर से अधिक की दूरी तक फैल गए।