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NASA: आर्टेमिस-II की वापसी के दौरान बढ़ गई थीं नासा की धड़कनें; गर्मी बढ़ने और रफ्तार से हो सकता था ब्लास्ट

Sat, 11 Apr 2026 11:31 AM IST
Riya Dubey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

आर्टेमिस-II मिशन की री-एंट्री सबसे जोखिम भरा चरण रहा, जहां ओरियन यान 40,000 किमी/घंटा की रफ्तार और 2,760°C तापमान झेलते हुए पृथ्वी पर लौटा। कुछ मिनटों के संचार ब्लैकआउट के बाद सफल लैंडिंग हुई और चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित वापस आए। आइए विस्तार से जानते हैं।
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आर्टेमिस ।। मिशन के अंतरिक्ष यात्री - फोटो : X (@NASA)
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विस्तार
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नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। 10 दिन की ऐतिहासिक चंद्र यात्रा के बाद चारों अंतरिक्ष यात्री शनिवार तड़के प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग के साथ पृथ्वी पर लौट आए। यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा और भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। री-एंट्री के दौरान कुछ मिनटों के संचार ब्लैकआउट ने तनाव जरूर बढ़ाया, लेकिन जैसे ही मिशन कमांडर रीड वाइसमैन की आवाज 'ह्यूस्टन, हम आपको साफ सुन पा रहे हैं' सुनाई दी, कंट्रोल रूम में राहत की लहर दौड़ गई।

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इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, जेरेमी हैनसन और रीड वाइसमैन शामिल थे। यह पिछले पांच दशकों में पहली बार था जब इंसानों ने चंद्रमा के पास जाकर फ्लाईबाय किया।

री-एंट्री सबसे बड़ा खतरा

मिशन का सबसे जोखिम भरा चरण पृथ्वी के वायुमंडल में वापसी रहा। अंतरिक्ष यान करीब 40,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 2,760 डिग्री सेल्सियस तापमान झेलते हुए लौटा। यह ध्वनि की गति से लगभग 30 गुना तेज और सूर्य की सतह के तापमान का लगभग आधा था। इस दौरान ओरियन कैप्सूल लाल-गर्म प्लाज्मा से घिर गया और करीब छह मिनट तक संपर्क टूट गया। सफलतापूर्वक पैराशूट खुलने और सुरक्षित लैंडिंग के बाद मिशन कंट्रोल में तालियां गूंज उठीं।

पुरानी चुनौती पर मिली जीत

2022 के आर्टेमिस-I मिशन में हीट शील्ड के क्षरण को लेकर चिंता जताई गई थी। इस बार जोखिम को कम करने के लिए री-एंट्री का मार्ग छोटा और अधिक तीव्र रखा गया, जिससे मिशन की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित की जा सकी।

इस बार की टीम में क्या खास?

यह मिशन विविधता के लिहाज से भी खास रहा। क्रिस्टीना कोच पहली महिला बनीं, विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और जेरेमी हैनसन चंद्र मिशन पर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी बने। यह अपोलो युग के एकरूप दलों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है।

नया रिकॉर्ड कायम

आर्टेमिस-II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से अब तक की सबसे अधिक दूरी तय की। वे अपोलो-13 के रिकॉर्ड से करीब 6,400 किलोमीटर आगे, कुल 4,06,771 किलोमीटर दूर तक पहुंचे।

दिखे अद्भुत नजारे

मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने हजारों तस्वीरें लीं, जिनमें अर्थसेट नामक तस्वीर खास रही, जिसमें चंद्रमा की सतह के पीछे उगती पृथ्वी दिखाई देती है। उन्होंने उल्का पिंडों की चमक, अंतरिक्ष से सूर्य ग्रहण और चंद्रमा के दूर वाले हिस्से (फार साइड) को भी देखा, जिसे अब तक केवल रोबोटिक मिशन ही देख पाए थे।
 

भावनात्मक पल भी आए सामने

मिशन के दौरान एक भावुक क्षण तब आया जब अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के दो क्रेटरों का नाम अपने यान और वाइसमैन की दिवंगत पत्नी के नाम पर रखने की अनुमति मांगी।

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अंतरिक्ष में भोजन और जीवन

मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए 189 प्रकार के भोजन विकल्प उपलब्ध थे, जिनमें कॉफी, स्मूदी, टॉर्टिला, पास्ता, कुकीज और चॉकलेट शामिल थे। इन्हें पोषण और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।

मिशन की उपलब्धियां और चुनौतियां

यह मिशन एसएलएस रॉकेट और ओरियन यान की पहली मानवयुक्त उड़ान था। इसमें जीवन-समर्थन, नेविगेशन, प्रोपल्शन और आपातकालीन प्रणालियों का सफल परीक्षण किया गया। हालांकि, मिशन के दौरान शौचालय में खराबी और पानी व ईंधन प्रणाली में कुछ तकनीकी समस्याएं भी सामने आईं।

आगे की राह

नासा के मुताबिक, यह मिशन चंद्रमा पर इंसानों की वापसी की दिशा में अहम कदम है। अगले मिशन आर्टेमिस-III में अंतरिक्ष यात्री चंद्र लैंडर के साथ डॉकिंग का अभ्यास करेंगे, जबकि 2028 में आर्टेमिस-IV के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की योजना है। नासा ने कहा हम फिर से इंसानों को चंद्रमा पर भेजने और सुरक्षित वापस लाने के मिशन में लौट आए हैं, यह तो बस शुरुआत है।

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