नासा प्रमुख जिम ब्रिडेन्टाइन ने कहा, यह भयानक, बेहद भयानक है कि ऐसा काम किया गया जिससे मलबा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से भी ऊपर जा रहा है। ऐसी गतिविधियों की वजह से भविष्य में मानव को अंतरिक्ष में भेजना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘जब एक देश ऐसा करता है तो दूसरे देशों को भी लगता है कि उन्हें भी ऐसा करना चाहिए, यह अस्वीकार्य है। नासा को इस बारे में स्पष्ट रुख अपनाने की जरूरत है कि इसका हम पर क्या असर पड़ता है।’
अंतरिक्ष में पहले से हैं मलबे के 10,000 टुकड़े
नासा प्रमुख के मुताबिक फिलहाल अमेरिकी संस्था ऐसे 23,000 लक्ष्यों पर नजर रखे हुए है जिनका आकार 10 सेंटीमीटर से ज्यादा है। इसमें 10,000 टुकड़े अंतरिक्ष मलबे के भी शामिल हैं। इनमें से तीन हजार सिर्फ चीन द्वारा 2007 में किए गए ऐसे ही प्रयोग की वजह से फैले थे। अब भारतीय परीक्षण के बाद मलबे के अंतरिक्ष स्टेशन से टकराने के चांस 44 प्रतिशत बढ़ गए हैं। हालांकि, मलबे के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद यह खतरा कम हो जाएगा।