फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UN: गणित में भारतीय सभ्यता के योगदान पर प्रदर्शनी, जयशंकर बोले- अतीत को लेकर गलत धारणाओं को ठीक करना जरूरी

Tue, 12 May 2026 01:17 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र।

सार

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रदर्शनी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया ने लंबे समय तक वैज्ञानिक और गणितीय प्रगति को सीमित नजरिये से देखा, जबकि भारत की प्राचीन गणितीय विरासत ने आधुनिक तकनीक और विज्ञान की नींव रखी है। प्रदर्शनी में शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, द्विआधारी गणना और खगोलीय गणना जैसे भारतीय गणितीय योगदानों को प्रदर्शित किया गया, साथ ही आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर जैसे विद्वानों की परंपरा को भी सम्मान दिया गया। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : एक्स/डॉ. एस जयशंकर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गणित में भारतीय सभ्यता के योगदान को दर्शाने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति की वैश्विक कहानी को लंबे समय तक एक 'संकीर्ण नजरिये' से देखा गया है। अब इतिहास को लेकर गलत धारणाओं को सुधारने की जरूरत है।
विज्ञापन


संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की ओर से 'शून्य से अनंत- गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान' के नाम से यह प्रदर्शनी आयोजित की गई है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने इसे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से आयोजित किया है। 

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए जयशंकर ने कहा कि जब दुनिया संयुक्त राष्ट्र में साझा मानव विरासत की बात कर रही है, तब यह समझना जरूरी है कि आधुनिक इतिहास में वैज्ञानिक प्रगति की कहानी को बहुत लंबे समय तक सीमित समय और सीमित भौगोलिक नजरिये से देखा गया है। उन्होंने इसको ऐतिहासिक और अपनी तरह की पहली गणित प्रदर्शनी बताया, जिसे संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित किया गया है।
विज्ञापन

 

गणित में भारतीय सभ्यता के योगदान पर प्रदर्शनी - फोटो : एक्स/डॉ. एस जयशंकर
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए?
इस कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत विनय प्रधान, प्रिंसटन विश्वविद्यालय के गणित प्रोफेसर और फील्ड्स पद विजेता मंजुल भार्गव, संयुक्त राष्ट्र के राजदूत, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जयशंकर ने कहा, दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के साथ अब सांस्कृतिक संतुलन भी बदल रहा है। इसके लिए जरूरी है कि अलग-अलग सभ्यताओं की कहानियों और इतिहास को जगह मिले, ताकि अतीत को ज्यादा व्यापक तरीके से समझा जा सके।

जयशंकर 2 से 10 मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर थे। न्यूयॉर्क में अपने संक्षिप्त दौरे के दौरान उन्होंने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी 'साम्हिता' (दक्षिण एशियाई पांडुलिपियों का इतिहास और दस्तावेज संग्रह) परियोजना का हिस्सा है, जिसे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर संचालित कर रहा है और जिसे विदेश मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है।

प्रदर्शनी में लोगों से मिलते विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : एक्स/डॉ. एस जयशंकर
प्रदर्शनी में क्या खास है?
यह विशेष प्रदर्शनी भारत से निकले उन प्राचीन गणितीय विचारों को दिखाती है, जो बाद में पूरी दुनिया में फैले। इनमें शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, कलन विधि, ग्रहों के मॉडल, खगोलीय गणना, क्रमचय-संचय (कॉम्बिनेटरिक्स), द्विआधारी (बाइनरी) गणना और ज्यामिति जैसे विषय शामिल हैं। इसमें 'बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय' को भी प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में महान भारतीय विद्वानों आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर से लेकर केरल का खगोल विज्ञान और गणित विद्यालय तक की परंपरा को भी सम्मान दिया गया है।

गणित में भारतीय सभ्यता के योगदान पर प्रदर्शनी - फोटो : एक्स/डॉ. एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि यहां मौजूद लोग केवल दीवार पर लिखे अंकों को नहीं देख रहे हैं, बल्कि उस सभ्यता को देख रहे हैं, जिसकी बौद्धिक जड़ें भारत की धरती में हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल अतीत की नहीं, बल्कि भविष्य की भी विरासत है। उन्होंने कहा कि तकनीक के लोकतंत्रीकरण के साथ-साथ इतिहास का लोकतंत्रीकरण भी जरूरी है। उनके अनुसार, जब तक अतीत की गलत धारणाओं को ठीक नहीं किया जाएगा, तब तक भविष्य की चुनौतियों को सही तरीके से नहीं समझा जा सकेगा।

ये भी पढ़ें:  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा- टैरिफ की धमकी से माने देश, प्रवासियों को लेने को हुए तैयार

उन्होंने कहा, यह प्रदर्शनी दर्शकों को हजारों वर्षों की यात्रा पर ले जाती है, जहां वे देख सकते हैं कि भारतीय सभ्यता से निकली गणितीय खोजें किस तरह दुनिया में फैलीं और आज भी आधुनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। जयशंकर ने कहा कि गणित के वैश्विक प्रसार की कहानी आपसी जुड़ाव की कहानी है। लेकिन हर विचार की शुरुआत कहीं न कहीं से होती है। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग की बुनियाद बनने वाला कोड भारत में सदियों पहले ही सोचा जा चुका था।

उन्होंने कहा कि एक ही तरह की कहानी के आधार पर संयुक्त राष्ट्र जैसे विविध और लोकतांत्रिक मंच को नहीं बनाया जा सकता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के दौर में अतीत की सही समझ और भी अहम हो जाएगी। जयशंकर ने उम्मीद जताई कि यह प्रदर्शनी दुनिया की बहुलतावादी प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी और तकनीक को लेकर बनी पूर्व धारणाओं को भी दूर करेगी।

उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी याद दिलाती है कि गणित एक सार्वभौमिक भाषा है और इसका प्रसार पूरी दुनिया के हित में रहा है। संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में इस संदेश से प्रेरणा ले सकता है।
विज्ञापन

हरीश पी. - फोटो : एक्स/India at UN, NY
वरिष्ठ राजनयिक हरीश पर्वतनेनी ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पी. ने कहा कि गणित सार्वभौमिक है और अलग-अलग सभ्यताओं के योगदान से समृद्ध हुई है। यह मानवता को जोड़ती है, बांटती नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, त्रिकोणमिति और अनंत जैसी अवधारणाओं की यात्रा को दिखाती है, जो भारत से निकलकर दुनिया की दूसरी संस्कृतियों तक पहुंचीं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में गणित केवल सैद्धांतिक विषय नहीं रहा, बल्कि इसने कला, वास्तुकला, संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को भी प्रभावित किया। यह आज भी एक जीवंत और विकसित होती परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपने ज्ञान को पूरी दुनिया के साथ साझा किया है। आज जिस 'ओपन सोर्स' की बात होती है, वह भारत में प्राचीन समय से ही एक विचारधारा रही है।

उन्होंने बताया कि 11 से 15 मई तक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में चलने वाली यह प्रदर्शनी प्राचीन ज्ञान को आधुनिक समय से जोड़ती है। आज कंप्यूटर एल्गोरिदम, जीपीएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिन सिद्धांतों पर काम करते हैं, उनकी जड़ें इतिहास में बहुत गहरी हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी लोगों को भारत की गणितीय विरासत को पूरी मानवता की साझा धरोहर के रूप में देखने का निमंत्रण देती है। यह बताती है कि प्रगति अलग-अलग संस्कृतियों और पीढ़ियों के सहयोग से बनती है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें