1. आसिफ अली जरदारी
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उनके बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी भ्रष्टाचार के मामले में बुधवार को भ्रष्टाचार-रोधी संस्था के सामने पेश हुए। एजेंसी ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की।
आसिफ और बिलावल कराची की रियल स्टेट कंपनी पार्क लेन स्टेट द्वारा कथित कर्ज लेने से संबंधित एक मामले में राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो के सामने पेश हुए। इस कंपनी में आसिफ और बिलावल सह मालिक हैं। एनएबी ने दावा किया है कि पंजाब वन विभाग से संबंधित जमीन को कुछ सरकारी अफसरों ने गैर कानूनी तरीके से कंपनी के नाम स्थानांतरित कर दिया था।
एनएबी के अधिकारियों ने बिलावल और जरदारी से भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों पर करीब दो घंटे तक पूछताछ की। एनएबी ने सवालों की एक फहरिस्त उन्हें सौंपी है जिस पर 30 मार्च तक जवाब देना है। एनएबी के दफ्तर में उनके पहुंचने से पहले सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सैकड़ों समर्थक अपने नेताओं की हिमायत में एनएबी के दफ्तर के पास जमा हो गए और पुलिस उन्हें जब शीर्ष नेताओं तक पहुंचने से रोका तो उनकी पुलिस से झड़प भी हुई।
बाद में एक पत्रकार वार्ता में बिलावल ने एनएबी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि मैं जब भी सरकार की आलोचना करता हूं एनएबी सक्रिय हो जाती है। बिलावल ने कहा कि एनएबी के काले कानून में संशोधन नहीं करना पीपीपी की कमजोरी और गलती है।
बहरहाल, उन्होंने काले कानून के बारे में विस्तार से नहीं बताया। पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ का हवाला देते हुए बिलावल ने कहा कि एक तानाशाह की ओर से लाए गए काले कानून में हम बदलाव नहीं कर पाए यह हमारी गलती है। हमारी कमजोरी है।