नए वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित विशाल दक्षिण ध्रुव-ऐटकेन बेसिन का निर्माण अरबों वर्ष पहले हुई एक महाविनाशकारी खगोलीय टक्कर से हुआ था। इस घटना ने चंद्रमा की गहराई में मौजूद पदार्थ को सतह के निकट पहुंचा दिया और बड़ी मात्रा में चट्टानी सामग्री को बाहर फेंककर फिर आसपास जमा कर दिया।
चंद्रमा के सबसे बड़े और सबसे पुराने प्रभाव-गर्त (इम्पैक्ट बेसिन) दक्षिण ध्रुव-ऐटकेन (साउथ पोल-ऐटकेन या एसपीए) बेसिन को लेकर हुए नए शोध ने संकेत दिया है कि अरबों वर्ष पहले हुई एक विशाल खगोलीय टक्कर ने चंद्रमा के भीतर गहराई में मौजूद पदार्थ को सतह के अपेक्षाकृत करीब ला दिया था।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में नासा के आर्टेमिस मिशनों के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले अंतरिक्ष यात्री इन चट्टानों का अध्ययन कर चंद्रमा की उत्पत्ति, विकास और आंतरिक संरचना से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोज सकते हैं। यह निष्कर्ष नासा से जुड़े वर्चुअल शोध संगठन सेंटर फॉर लूनर ओरिजिन एंड इवोल्यूशन (सीएलओई) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए दो पूरक अध्ययनों से सामने आया है।
इनमें से एक अध्ययन साइंस एडवांसेज पत्रिका में और दूसरा जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च प्लैनेट्स में प्रकाशित हुआ है। दक्षिण ध्रुव-ऐटकेन बेसिन चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से (फार साइड) पर स्थित है और इसे सौर मंडल की सबसे पुरानी संरक्षित टक्कर- जनित संरचनाओं में गिना जाता है। इसका आकार काफी विशाल है।
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चंद्रमा के भीतर से निकला पदार्थ
शोध के अनुसार इस विशाल टक्कर ने चंद्रमा की सतह पर गहरा और असमान गड्ढा बना दिया। टक्कर से उत्पन्न अत्यधिक ताप के कारण बेसिन के केंद्रीय भाग में बड़ी मात्रा में चट्टानें पिघल गईं। साथ ही चंद्रमा की ऊपरी परत (क्रस्ट) और उससे नीचे स्थित मेंटल से भारी मात्रा में पदार्थ अंतरिक्ष में उछल गया। बाद में यह पदार्थ वापस चंद्रमा पर गिरा और बेसिन तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में जमा हो गया। यही जमा सामग्री बेहद खास है।