म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून में शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने 1000 से अधिक तख्तापलट विरोधियों को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। दरअसल, प्रदर्शनकारी यांगून में एक लोकप्रिय शॉपिंग मॉल के सामने जुट गए थे।
उल्लेखनीय है कि म्यामांर साल 1962 से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग था। यहां पांच दशक तक सैन्य शासन रहा। हाल के वर्षों में लोकतंत्र कायम करने की दिशा में आंशिक लेकिन अहम प्रगति हुई थी, लेकिन एक फरवरी को हुए तख्तापलट से इस प्रक्रिया को खासा झटका लगा है।
सू की के लिए तो यह और भी बड़ा झटका है, जिन्होंने लोकतंत्र की मांग को लेकर वर्षों तक संघर्ष किया, वर्षों तक वह नजरबंद रहीं और अपने प्रयासों के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला। उन्होंने कई बार चेताया था कि अगर शक्तिशाली सेना बदलावों को स्वीकार करती है तो ही देश के लोकतांत्रिक सुधार सफल होंगे।
हालांकि, इस बीच एक फरवरी को म्यांमार में सेना ने सोमवार को तख्तापलट कर दिया और शीर्ष नेता आंग सान सू की समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद यह घोषणा की गई कि सेना प्रमुख जनरल मिन आंग लाइंग ने एक साल के लिए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।
इस घोषणा के दौरान सेना के तैयार किए संविधान के उस हिस्से का हवाला दिया गया, जो राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में देश का नियंत्रण सेना को अपने हाथों लेने की इजाजत देता है।