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म्यांमार : रिपोर्ट में दावा, रोहिंग्याओं का जनसंहार नहीं, युद्ध अपराध हुए, सेना दोषी नहीं

Wed, 22 Jan 2020 12:44 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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म्यांमार का राष्ट्रीय ध्वज
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म्यांमार के रखाइन प्रांत में 2017 के दौरान रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ जनसंहार के आरोपों की जांच के लिए सरकार द्वारा नियुक्त समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट जारी की है। जांच समिति ने पाया कि कुछ सैनिकों ने संभवत: अल्पसंख्यकों के विरुद्ध युद्ध अपराध को अंजाम दिया लेकिन सेना को जनसंहार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। अधिकार समूहों व रोहिंग्या नेताओं ने इसे खारिज किया है।

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जांच समिति की रिपोर्ट में पहली बार रोहिंग्याओं के साथ सेना के युद्ध अपराध का जिक्र किया गया लेकिन बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत का फैसला आने से ठीक पहले मानवाधिकार समूहों और रोहिंग्या नेताओं ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से नकार दिया है। यूएन की शीर्ष अदालत यह फैसला सुनाएगी कि म्यांमार में जारी कथित जनसंहार को रोकने के लिए त्वरित उपाय की जरूरत है या नहीं। 

संयुक्त राष्ट्र के फैसले के ठीक पहले इंडिपेंडेंट कमीशन ऑफ इंक्वायरी (आईसीओई) के जांच नतीजे अहम हैं। आईसीओई ने माना कि कुछ सुरक्षा कर्मियों ने बेहिसाब ताकत का इस्तेमाल किया, युद्ध अपराधों को अंजाम दिया और मानवाधिकारों का गंभीर रूप से उल्लंघन किया जिसमें निर्दोष ग्रामीणों की हत्या करना और उनके घरों को तबाह करना शामिल है। हालांकि उसने यह भी कहा कि ये अपराध जनसंहार की श्रेणी में नहीं आते हैं।

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7.40 लाख रोहिंग्याओं ने छोड़ा देश

पैनल के मुताबिक, ‘इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सबूत पर्याप्त नहीं हैं कि जो अपराध किए गए वे राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को या उसके हिस्से को तबाह करने के इरादे से किए गए।’ इन सैन्य अभियानों के चलते करीब 7.40 लाख रोहिंग्याओं को देश छोड़ना पड़ा था। बौद्ध बहुल म्यांमार हमेशा से कहता रहा है कि सैन्य कार्रवाई रोहिंग्या उग्रवादियों के विरुद्ध की गई क्योंकि रोहिंग्या उग्रवादियों ने कई हमलों को अंजाम देकर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को मारा था।
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'रिपोर्ट ध्यान भटकाने की कोशिश'

बर्मीज रोहिंग्या ऑर्गेनाइजेशन, यूके के प्रवक्ता तुन खिन ने पैनल के निष्कर्षों को खारिज कर दिया और इसे अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया। ह्यूमन राइट्स वॉच के फिल रॉबर्ट्सन ने कहा कि रिपोर्ट में सेना को जिम्मेदारी से बचाने के लिए कुछ सैनिकों को बलि का बकरा बनाया गया है। जांच करने वाले पैनल में दो सदस्य स्थानीय और दो विदेशी हैं।
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