पैनल के मुताबिक, ‘इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सबूत पर्याप्त नहीं हैं कि जो अपराध किए गए वे राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को या उसके हिस्से को तबाह करने के इरादे से किए गए।’ इन सैन्य अभियानों के चलते करीब 7.40 लाख रोहिंग्याओं को देश छोड़ना पड़ा था। बौद्ध बहुल म्यांमार हमेशा से कहता रहा है कि सैन्य कार्रवाई रोहिंग्या उग्रवादियों के विरुद्ध की गई क्योंकि रोहिंग्या उग्रवादियों ने कई हमलों को अंजाम देकर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को मारा था।
बर्मीज रोहिंग्या ऑर्गेनाइजेशन, यूके के प्रवक्ता तुन खिन ने पैनल के निष्कर्षों को खारिज कर दिया और इसे अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया। ह्यूमन राइट्स वॉच के फिल रॉबर्ट्सन ने कहा कि रिपोर्ट में सेना को जिम्मेदारी से बचाने के लिए कुछ सैनिकों को बलि का बकरा बनाया गया है। जांच करने वाले पैनल में दो सदस्य स्थानीय और दो विदेशी हैं।