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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट, सू की व राष्ट्रपति गिरफ्तार, एक साल के लिए लगा आपातकाल

Tue, 02 Feb 2021 12:35 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून

सार

  • सेना ने देश को अपने नियंत्रण में लिया, नेपीता-यंगून में बख्तरबंद वाहनों की गश्त, कई शहरों में इंटरनेट बंद
  • म्यांमार की सेना ने देश में एक साल के लिए इमरजेंसी लगाई
  • भारत ने घटनाक्रम पर जताई चिंता, लोकतंत्र बहाल करने की अपील की
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने तख्तापलट और नेताओं की सैन्य हिरासत की निंदा की
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आंग सान सू ची - फोटो : File Photo
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विस्तार
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म्यांमार में 10 साल पहले लोकतांत्रिक प्रणाली अपनाई गई लेकिन देश में एक बार फिर सैन्य शासन लौट आया है। म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की और राष्ट्रपति यू विन मिंट समेत कई नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद सत्ता अपने हाथ में ले ली है। इन गिरफ्तारियों के बाद सैन्य स्वामित्व वाले टीवी चैनल मयावाडी से घोषणा की कि देश में एक साल तक आपातकाल रहेगा।

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म्यांमार की राजधानी नेपीता और मुख्य शहर यंगून में सड़कों पर सैनिक मौजूद हैं। यहां बख्तरबंद वाहन गश्त कर रहे हैं और कई शहरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बंद कर दी गई है। सैन्य टीवी चैनल ने बताया कि सेना ने देश को अपने नियंत्रण में ले लिया है। राष्ट्र्पति के दस्तखत वाली एक घोषणा के मुताबिक देश की सत्ता अब कमांडर-इन-चीफ ऑफ डिफेंस सर्विसेस मिन आंग ह्लाइंग के हाथों में रहेगी। देश के पहले उप राष्ट्रपति माइंट स्वे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है। उन्हें सेना प्रमुख का भी दर्ज दिया गया है। सेना ने कहा है कि उसने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि देश की स्थिरता खतरे में थी। जानकारी के मुताबिक, किसी भी विरोध को कुचलने के लिए सड़कों पर सेना तैनात है और फोन लाइनों को बंद कर दिया गया है। 

हालात बिगड़े
म्यांमार के सरकारी चैनल एमआरटीवी ने तकनीकी समस्याओं का हवाला देते हुए प्रसारण बंद कर दिया है जिससे सूचनाओं का सही तरह से आदान-प्रदान रुक गया है। सैन्य कार्रवाई के चलते राजधानी नेपीता से संपर्क टूटने के कारण हालात बिगड़ गए हैं। यहां अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों को ब्लॉक कर दिया गया है और स्थानीय स्टेशन ऑफ एयर हो गए हैं। यंगून में स्थानीय लोगों ने आने वाले दिनों में नकदी की कमी पड़ने की आशंकाओं के चलते एटीएम के सामने लाइन लगाना शुरू कर दिया है। म्यांमार बैंकिंग एसोशिएसन के मुताबिक, बैंकों ने कुछ समय के लिए सभी आर्थिक सेवाओं को रोक दिया है।
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सेना ने कहा, आपातकाल के बाद होंगे चुनाव

म्यांमार की सेना ने कहा कि देश में एक साल का आपातकाल खत्म होने के बाद चुनाव होंगे। इस दौरान चुनाव आयोग में सुधार किया जाएगा और पिछले साल नवंबर में होने वाले चुनावों की समीक्षा भी की जाएगी। सेना ने दोहराया कि 8 नवंबर, 2020 को चुनावों में बड़े पैमाने पर मतदान के दौरान धोखाधड़ी हुई थी। बता दें कि इस चुनाव में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने 83 फीसदी सीटें जीत ली थीं। सेना और सरकार के बीच तभी से तनाव था जिसकी परिणति तख्तापलट के साथ हुई है।

सेना ने दी थी संविधान खत्म करने की चेतावनी

संसद के नए सत्र से पहले सेना ने चेतावनी दी थी कि चुनाव में वोट के फर्जीवाड़े की शिकायत पर यदि कार्रवाई नहीं हुई तो सेना कदम उठाएगी। इस हफ्ते सैन्य प्रवक्ता द्वारा तख्तापलट की संभावनाओं को खारिज करने से इनकार करने के बाद से ही देश में सियासी तनाव बढ़ गया था। वहीं, कमांडर इन चीफ ने यहां तक कह दिया कि यदि संविधान का पालन नहीं किया गया तो उसे वापस ले लिया जाएगा। 

एनएलडी ने लोगों से तख्तापलट का विरोध करने का अव्हान किया

म्यामांर की नेता आंग सान सू की के सियासी दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने देश के लोगों से सैन्य तख्तापलट और तानाशाही कायम करने की कोशिशों का विरोध करने का आव्हान किया है। पार्टी प्रमुख ने सू की के फेसबुक पेज पर कहा गया है कि सेना के कदम अन्यायपूर्ण हैं और मतदाताओं की इच्छा एवं संविधान के विपरीत हैं। हालांकि यह पता नहीं चला है कि यह संदेश किसने डाला है।

लंबे समय नजरबंद रहीं सू की

म्यांमार में 2011 तक सेना का शासन रहा है। आंग सान सू की ने कई साल तक देश में लोकतंत्र लाने के लिए लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक घर में नजरबंद रहना पड़ा। लोकतंत्र आने के बाद संसद में सेना के प्रतिनिधियों के लिए तय कोटा रखा गया। संविधान में ऐसा प्रावधान किया गया कि सू की कभी राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकतीं।
 

भारत समेत कई देशों ने जताई चिंता

भारत ने जताई चिंता, कहा- हालात पर रखे हैं निगाह
भारत ने म्यामांर में सैन्य तख्तापलट और शीर्ष नेताओं को हिरासत में लेने पर ‘गहरी चिंता’ जताते हुए कहा कि उसने पड़ोसी देश में सत्ता के लोकतांत्रिक ढंग से हस्तांतरण का हमेशा समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत म्यामांर के हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, हमारा मानना है कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। बता दें कि पड़ोसी देश में हुए घटनाक्रम से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत के म्यांमार की नेता आंग सान सू की के साथ हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं। 
भारत से मुकाबले को चीन बढ़ा रहा प्रभाव

भारत और म्यांमार के बीच 1,600 किमी से ज्यादा लंबी सीमा है और दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसी के काफी पुराने रिश्ते रहे हैं। लेकिन चीन इस सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में चीन अलगाववाद तथा घुसपैठ बढ़ाना चाहता है। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के मुताबिक, म्यांमार के विद्रोहियों को चीन हथियार देकर भारत के खिलाफ उकसा रहा है। दूसरी तरफ, भारत यहां लोकतंत्र का समर्थक रहा है। ऐसे में म्यांमार की सेना के चीन की तरफ झुकाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

अमेरिका ने कहा, शीर्ष नेताओं को तुरंत रिहा करें अन्यथा कार्रवाई करेंगे

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट और आंग सान सू की समेत देश के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर अमेरिका ने धमकी दी है कि यदि देश में लोकतंत्र को बहाल करने के लिए सही कदम नहीं उठाए गए तो वह कार्रवाई करेगा। व्हाइट की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, म्यांमार सेना ने देश में कायम हुए लोकतंत्र को कमतर करने के कदम उठाए हैं। इन खबरों से अमेरिका चिंतित है।

साकी ने कहा कि अमेरिका म्यामांर के लोकतांत्रिक प्रतिष्ठानों के प्रति अपना मजबूत समर्थन जताता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति जो बाइडन को हालात से अवगत कराया है। साकी ने कहा, हम लोग स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और म्यामांर के लोगों के साथ हैं जिन्होंने लोकतंत्र एवं शांति के लिए पहले ही काफी कुछ झेला है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि हमने म्यामांर की सेना से सभी सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिहा करने और आठ नवंबर को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुए हुए चुनावों में देश की जनता के फैसले का सम्मान करने को कहा है। उन्होंने कहा, सेना को अपने कदमों से तुरंत पलटना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने भी सू कीी तथा अन्य नेताओं को म्यांमार सेना द्वारा हिरासत में लेने की निंदा करते हुए देश की सत्ता सेना के हाथों में जाने पर चिंता जताई। गुटेरस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, महासचिव ने देश के शीर्ष नेताओं को हिरासत में लेने की कड़ी निंदा करते हुए मौजूदा हालात को म्यांमार में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए एक बड़ा झटका बताया है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की और अन्य वरिष्ठ नागरिकों को गिरफ्तार कर देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म करने का कदम उठाया है। अमेरिका ने म्यांमार की सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ने हाल के चुनावों के परिणामों को बदलने या म्यांमार के लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया है। अगर ये तख्तापलट खत्म नहीं हुआ, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  वहीं ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मरिज पायने ने सू की की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि हम नवंबर 2020 के आम चुनाव के परिणामों के अनुरूप नेशनल असेंबली के शांतिपूर्ण पुनर्गठन का पुरजोर समर्थन करते हैं।

बोरिस जॉनसन ने की विद्रोह की निंदा
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी म्यांमार में तख्ता पलट की निंदा की है। उन्होंने कहा कि आंग सान सू की और अन्य नेताओं को गिरफ्तार किए जाने की वह निंदा करते हैं। जॉनसन ने ट्वीट कर कहा कि लोगों का लोगों के वोट का आदर किया जाना चाहिए। 

बांग्लादेश ने की शांति बहाली की मांग
बांग्लादेश ने भी म्यांमार में शांति व स्थिरता बहाल करने की मांग की है। उम्मीद जताई  कि ताजा घटनाक्रम से रोहिंग्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। देश के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि म्यांमार में जल्द लोकतांत्रिक प्रबंध कायम होंगे। 

इन देशों ने भी की निंदा
सिंगापुर ने भी म्यांमार के घटनाक्रम की निंदा करते हुए लोकतंत्र बहाली की मांग की। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आंग सान सू की व अन्य नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की। 

सोमवार को होना था संसद का पहला सत्र 
बता दें कि म्यांमार के सांसदों को पिछले साल के चुनाव के बाद से संसद के पहले सत्र के लिए राजधानी नयापीटा में सोमवार को इकट्ठा होना था।
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राजनीतिक संकट का कारण

सेना ने कहा है कि चुनाव परिणामों में हुई धांधली के बाद कार्रवाई की गई है। दरअसल, नवंबर, 2020 के चुनावों में संसद के संयुक्त निचले और ऊपरी सदनों में सू की की पार्टी ने 476 सीटों में से 396 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन सेना के पास 2008 के सैन्य-मसौदा संविधान के तहत कुल सीटों का 25 फीसदी आरक्षित हैं। कई प्रमुख मंत्री पद भी सेना के लिए आरक्षित हैं। 

 तभी से सेना आरोप लगा रही थी कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। हालांकि, सेना चुनाव में धांधली का सबूत नहीं दे पाई।






 
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