भारत ने जताई चिंता, कहा- हालात पर रखे हैं निगाह
भारत ने म्यामांर में सैन्य तख्तापलट और शीर्ष नेताओं को हिरासत में लेने पर ‘गहरी चिंता’ जताते हुए कहा कि उसने पड़ोसी देश में सत्ता के लोकतांत्रिक ढंग से हस्तांतरण का हमेशा समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत म्यामांर के हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, हमारा मानना है कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। बता दें कि पड़ोसी देश में हुए घटनाक्रम से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत के म्यांमार की नेता आंग सान सू की के साथ हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं।
भारत से मुकाबले को चीन बढ़ा रहा प्रभाव
भारत और म्यांमार के बीच 1,600 किमी से ज्यादा लंबी सीमा है और दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसी के काफी पुराने रिश्ते रहे हैं। लेकिन चीन इस सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में चीन अलगाववाद तथा घुसपैठ बढ़ाना चाहता है। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के मुताबिक, म्यांमार के विद्रोहियों को चीन हथियार देकर भारत के खिलाफ उकसा रहा है। दूसरी तरफ, भारत यहां लोकतंत्र का समर्थक रहा है। ऐसे में म्यांमार की सेना के चीन की तरफ झुकाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
अमेरिका ने कहा, शीर्ष नेताओं को तुरंत रिहा करें अन्यथा कार्रवाई करेंगे
म्यांमार में सैन्य तख्तापलट और आंग सान सू की समेत देश के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर अमेरिका ने धमकी दी है कि यदि देश में लोकतंत्र को बहाल करने के लिए सही कदम नहीं उठाए गए तो वह कार्रवाई करेगा। व्हाइट की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, म्यांमार सेना ने देश में कायम हुए लोकतंत्र को कमतर करने के कदम उठाए हैं। इन खबरों से अमेरिका चिंतित है।
साकी ने कहा कि अमेरिका म्यामांर के लोकतांत्रिक प्रतिष्ठानों के प्रति अपना मजबूत समर्थन जताता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने राष्ट्रपति जो बाइडन को हालात से अवगत कराया है। साकी ने कहा, हम लोग स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और म्यामांर के लोगों के साथ हैं जिन्होंने लोकतंत्र एवं शांति के लिए पहले ही काफी कुछ झेला है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि हमने म्यामांर की सेना से सभी सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिहा करने और आठ नवंबर को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुए हुए चुनावों में देश की जनता के फैसले का सम्मान करने को कहा है। उन्होंने कहा, सेना को अपने कदमों से तुरंत पलटना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने भी सू कीी तथा अन्य नेताओं को म्यांमार सेना द्वारा हिरासत में लेने की निंदा करते हुए देश की सत्ता सेना के हाथों में जाने पर चिंता जताई। गुटेरस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, महासचिव ने देश के शीर्ष नेताओं को हिरासत में लेने की कड़ी निंदा करते हुए मौजूदा हालात को म्यांमार में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए एक बड़ा झटका बताया है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की और अन्य वरिष्ठ नागरिकों को गिरफ्तार कर देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म करने का कदम उठाया है। अमेरिका ने म्यांमार की सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ने हाल के चुनावों के परिणामों को बदलने या म्यांमार के लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया है। अगर ये तख्तापलट खत्म नहीं हुआ, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मरिज पायने ने सू की की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि हम नवंबर 2020 के आम चुनाव के परिणामों के अनुरूप नेशनल असेंबली के शांतिपूर्ण पुनर्गठन का पुरजोर समर्थन करते हैं।
बोरिस जॉनसन ने की विद्रोह की निंदा
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी म्यांमार में तख्ता पलट की निंदा की है। उन्होंने कहा कि आंग सान सू की और अन्य नेताओं को गिरफ्तार किए जाने की वह निंदा करते हैं। जॉनसन ने ट्वीट कर कहा कि लोगों का लोगों के वोट का आदर किया जाना चाहिए।
बांग्लादेश ने की शांति बहाली की मांग
बांग्लादेश ने भी म्यांमार में शांति व स्थिरता बहाल करने की मांग की है। उम्मीद जताई कि ताजा घटनाक्रम से रोहिंग्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। देश के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि म्यांमार में जल्द लोकतांत्रिक प्रबंध कायम होंगे।
इन देशों ने भी की निंदा
सिंगापुर ने भी म्यांमार के घटनाक्रम की निंदा करते हुए लोकतंत्र बहाली की मांग की। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आंग सान सू की व अन्य नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की।
सोमवार को होना था संसद का पहला सत्र
बता दें कि म्यांमार के सांसदों को पिछले साल के चुनाव के बाद से संसद के पहले सत्र के लिए राजधानी नयापीटा में सोमवार को इकट्ठा होना था।