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Myanmar Elections: म्यांमार में तख्तापलट के पांच साल बाद जुंटा की निगरानी में चुनाव, पहले चरण की वोटिंग आज

Sun, 28 Dec 2025 08:07 AM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नेपीडॉ

सार

सेना ने दुर्व्यवहार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह आतंकवादियों को निशाना बना रही है। सेना दावा किया है कि चुनाव का उद्देश्य एक वास्तविक, अनुशासित बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण करना है। म्यांमार ने चुनावों की अंतरराष्ट्रीय आलोचना को खारिज कर दिया है।
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म्यांमार में आज आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। - फोटो : ANI
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विस्तार
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म्यांमार की चुनी हुई सरकार के तख्तापलट के करीब पांच साल बाद सैन्य जुंटा ने रविवार को कड़ी निगरानी में राष्ट्रीय चुनाव के लिए मतदान शुरू कराया। यह चुनाव फरवरी 2021 में सत्ता पर कब्जा करने के बाद से जुंटा की ओर से करवाया जा रहा पहला आम चुनाव है। म्यांमार में हुए तख्तापलट के बाद बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों ने देश को गृहयुद्ध में धकेल दिया, जो आज तक जारी है।

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सेना का दावा है कि यह चुनाव लोकतंत्र की वापसी का रास्ता तैयार करेगा। हालांकि, विपक्षी समूहों और मानवाधिकार संगठनों ने इस चुनाव को जुंटा शासन को जारी रखने की वैधता प्रदान करने के लिए उठाया गया कदम बताया है।

सैन्य जुंटा पर लग रहे गंभीर आरोप
ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब म्यांमार की सबसे लोकप्रिय सियासी नेता आंग सान सू की, जिनकी सरकार को फरवरी 2021 में सेना ने उखाड़ फेंका था, अभी भी जेल में हैं। उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) भंग कर दी गई है, जिससे वह प्रभावी रूप से राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर हो गई है।
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सीएनएन के अनुसार चुनावी परिदृश्य सैन्य जुंटा के पक्ष में भारी रूप से झुका हुआ है, जिसमें जुंटा से जुड़ी या समर्थित पार्टियों का दबदबा है। देश के कुछ हिस्सों में रविवार से मतदान शुरू हो गया है और यह तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है। म्यांमार में 11 जनवरी और 25 जनवरी को दो और चरण में मतदान होगा। अधिकारियों ने अंतिम नतीजे जारी करने की तारीख का एलान नहीं किया है।

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कई हिस्सों में नहीं होगा मतदान
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार सैन्य बलों और विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों व लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों के बीच जारी झड़पों के कारण कई क्षेत्रों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों और मध्य म्यांमार के कुछ हिस्सों में मतदान असंभव हो गया है। पिछले एक वर्ष में विद्रोही बलों ने सैन्य बलों को उल्लेखनीय नुकसान पहुंचाया है, जिससे विरोधियों में कुछ समय के लिए यह उम्मीद जगी थी कि सत्ता पर सैन्य बलों की पकड़ कमजोर हो सकती है।
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तीन चरणों के मतदान से पहले देशभर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। साथ ही एक नए कानून के तहत सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो चुनाव की आलोचना या प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयासों को अपराध घोषित करता है। मतदान के दौरान भी सेना ने विरोधियों के खिलाफ अपने अभियान जारी रखे हैं।

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