जरनल परवेज़ मुशर्रफ़ तो आपको याद होंगे ही। अरे कैसे भूल सकते हैं उन्हें, वही करगिल वाले, वही जिन्होंने नवाज़ शरीफ़ को चलता किया था। फिर उन्हें हाई जैकिंग केस में अटक के क़िले में बंद कर दिया था और फिर सऊदी विमान में बिठाकर जेद्दा भेज दिया था। वही मुशर्रफ़ जिन्होंने पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी को सुप्रीम कोर्ट से उठाकर घर में बंदी बना दिया था।
भारत हो या पाकिस्तान यहां सियासत भावनाओं और नियमों का नहीं टेक्निकैलिटी का खेल है। वही मुशर्रफ़ जिन्होंने संविधान को रौंदकर इमर्ज़ेंसी लगाई थी, वही जिनके होते बेनज़ीर भुट्टो शहीद हुई थीं और नवाज़ शरीफ़ दोबारा वापिस आए थे।
वही मुशर्रफ़ जिन्होंने इस वादे पर राष्ट्रपति भवन छोड़ने का फैसला किया कि जब वो भूतपूर्व हो जाएंगे तो उनके ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा नहीं बनाया जाएगा और गड़े मुर्दे नहीं उखाड़े जाएंगे। वही मुशर्रफ़ जिन पर नवाज़ शरीफ़ सरकार ने आते ही संविधान से गद्दारी का मुक़दमा कायम किया कि जिसकी सज़ा मौत है।