साल 2008 के मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा के स्टेट्स कॉन्फ्रेंस प्रस्ताव को अमेरिका की अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा कि अगले 30 दिनों में उसके मामले पर फैसला आने का अनुमान है। बता दें कि तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण मामले पर आखिरी सुनवाई जून 2021 में हुई थी। जिसके चलते तहव्वुर राणा ने अमेरिका की अदालत में स्टेट्स कॉन्फ्रेंस का प्रस्ताव दिया था।
क्या होता है स्टेट्स कॉन्फ्रेंस प्रस्ताव?
स्टेट्स कॉन्फ्रेंस एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत अदालत के आदेश से अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच बैठक का आदेश दिया जाता है, जिसमें मामले के विवरण और दोनों पक्षों में सुलह की कोशिश की जाती है। लंबे समय से मामले की सुनवाई ना होने पर तहव्वुर राणा के वकील ने बीते महीने यह प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि मामले पर आखिरी सुनवाई 21 जुलाई 2021 को हुई थी। आरोपी लगातार कैद में है। ऐसे में यह सही रहेगा कि अभियोजन और बचाव पक्ष मिलकर मामले की ताजा स्थिति पर चर्चा करें।
अदालत ने प्रस्ताव किया खारिज
लॉस एंजेलेस के यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की जज जैकलीन चूलजियान ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि दोनों पक्षों को सलाह दी जाती है कि अदालत मानकर चल रही है कि इस मामले में 30 दिनों के भीतर फैसला आ जाएगा। अदालत ने कहा कि स्टेट्स कॉन्फ्रेंस की मांग को खारिज किया जाता है क्योंकि अदालत को लगता है कि इस तरह की कार्यवाही बेवजह है और इससे अदालत को कोई मदद नहीं मिलेगी।
तहव्वुर राणा पर हैं ये आरोप
अभियोजन पक्ष के वकील ने अदालत की सुनवाई के दौरान कहा कि तहव्वुर राणा को मालूम था कि उसके बचपन का दोस्त डेविड कोलमैन हेडली लश्कर ए तैयबा का सदस्य है। इसके बावजूद राणा ने हेडली की मदद की। राणा को इस बात की भी जानकारी थी कि हेडली हमले की योजना बना रहा है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि तहव्वुर राणा साजिश का हिस्सा था। वहीं तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का उसके वकील द्वारा विरोध किया जा रहा है।
बता दें कि साल 2008 में हुए मुंबई हमले में लश्कर ए तैयबा के आतंकियों ने मुंबई में घुसकर 166 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे।