बांग्लादेश में मौजूद रोहिंग्या मुसलमानों के शिविरों में आग लगना इन दिनों आम बात हो गई है। शुरुआत में इन घटनाओं को हादसा माना गया। लेकिन अब इनको लेकर कठिन सवाल पूछे जाने लगे हैं। जिन शिविरों में रोहिंग्या मुसलमानों को बसाया गया है, वहां काफी भीड़भाड़ है। कॉक्स बाजार जैसे इलाके में पहले से सघन आबादी रहती है, जहां ज्यादातर रोहिंग्या शिविर बने हैं।
आग लगने की सबसे ताजा घटना सोमवार को हुई, जब रोंहिग्या बच्चों के लिए बनाए गए यूनिसेफ के चार स्कूल नष्ट हो गए। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने इस घटना को 'आगजनी हमला' कहा है। इसके पहले 14 जनवरी को टेकनाफ जिले में स्थित नयापाड़ा रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में पांच झुग्गियां जल गईं। इन दोनों ही घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ।
बांग्लादेश के अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक हाल में रोहिंग्या बस्तियों में आग लगने की जितनी भी घटना हुई हैं, उनमें अधिकारी उसका सही कारण ढूंढ पाने में नाकाम रहे हैं। इसको लेकर सवाल उठे हैं। साथ ही शक का माहौल गहराया है। यहां के अखबार ढाका ट्रिब्यून से बातचीत में कॉक्स बाजार फायर सर्विस के सहायक निदेशक मोहम्मद अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि इन अग्निकांडों का असल कारण पता नहीं लगाया जा सका है। लेकिन एक घटना में एक चश्मदीद ने फायर सर्विस को बताया कि आग गैस सिलिंडर से शुरू हुई। एक घटना में मच्छर भगाने के लिए जलाई जाने वाली कॉयल से आग लगी।
लेकिन स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं इन घटनाओं के पीछे साजिश होने की बात कही है। इन कार्यकर्ताओं का दावा है कि इन शिविरों में काम करने वाले कुछ एनजीओ का ही हाथ इन घटनाओं के पीछे है। ये घटनाएं हादसा नहीं हैं, बल्कि इन्हें अंजाम दिया गया है।
पलंगखाली यूनियन परिषद नामक एक संगठन के अध्यक्ष गफूरुद्दीन चौधरी ने दावा किया है कि एनजीओ के अधिकारी यह कह कर आग लगवा रहे हैं कि वे रोहिंग्या मुसलमानों के लिए पक्का घर बनवाएंगे। चौधरी ने कहा- 'एक तरफ रोहिंग्या मुसलमानों से पक्के घर का वादा किया जा रहा है, दूसरी तरफ एनजीओ को आग लगने के बाद अधिक फंड मिल रहा है।'
इसी राय का समर्थन कॉक्स बाजार छात्र लीग के नेता अली अहमद ने भी किया है। ढाका ट्रिब्यून से उन्होंने कहा- रोहिंग्या शिविरों में लग रही आग रहस्यमय है। हर आग देर रात लगती है, और उनमें कोई हताहत नहीं होता। इसलिए लोगों को यकीन हुआ है कि इन गतिविधियों में कुछ एनजीओ शामिल हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं कि आग लगने के बाद उन्हें नए घर बनवाने के लिए नए सिरे से फंड मिलता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस शक के आधार पर सभी ऐसी घटनाओं की गहराई से जांच कराने की मांग की है। नयापाड़ा शिविर में रहने वाले एक रोहिंग्या नेता ने भी कहा है कि 14 जनवरी की आग एक महिला की झुग्गी से शुरू हुई। लेकिन आग लगी कैसे, यह पता नहीं चल सका है। मोहम्मद रफीक नाम के इस रोहिंग्या नेता ने कहा कि सारा मामला रहस्य से घिरा हुआ है।
सरकारी अधिकारियों ने चुप्पी ने भी इस रहस्य को बढ़ाया है। अब तक सरकार की तरफ से इस मामले में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। रिफ्यूजी रिलीफ एंड रिपैट्रिएशन कमिश्नर ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा है। जबकि रोहिंग्या शिविरों में आग की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खूब कवरेज मिला है।