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Mount Everest: विशाल हिमालयी ग्लेशियर ने रोका पर्वतारोहियों का रास्ता, एवरेस्ट के कैंप वन तक पहुंच बंद

Sat, 25 Apr 2026 04:34 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला नेटवर्क, काठमांडो

सार

रिपोर्ट के अनुसार कई वर्षों से आइसफॉल डॉक्टर के रूप में काम कर रहे आंग सार्की शेरपा ने बताया कि उन्होंने 10 अप्रैल को इस अवरोध तक पहुंचकर स्थिति का आकलन किया था। नीचे की दरार यानी क्रेवास लगातार पिघल रही है और सेराक का निचला हिस्सा कमजोर पड़ चुका है।
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माउंट एवरेस्ट - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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नेपाल की ओर से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का मुख्य मार्ग इस समय खुम्बू आइसफॉल क्षेत्र में एक विशाल और अस्थिर हिमखंड के कारण बाधित हो गया है। बेस कैंप से ऊपर कैंप 1 के ठीक नीचे लगभग 100 फीट ऊंचा बर्फ का एक विशाल खंड, जिसे सेराक कहा जाता है, रास्ता रोककर खड़ा है। इससे वसंतकालीन पर्वतारोहण सीजन की तैयारियां हफ्तों पीछे चली गई हैं और आशंका बढ़ गई है कि यदि रास्ता देर से खुला, तो इस वर्ष भी शिखर तक पहुंचने के लिए पर्वतारोहियों की लंबी कतारें लग सकती हैं।
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बीबीसी के अनुसार कैंप 1 तक पहुंचने का रास्ता लगभग बंद हो चुका है। एवरेस्ट के निचले हिस्से में रस्सियां और सीढ़ियां लगाने वाले विशेष शेरपा दल, जिन्हें आइसफॉल डॉक्टर्स कहा जाता है, इस समय इस बर्फीले अवरोध को पार करने का सुरक्षित रास्ता नहीं खोज पाए हैं। यह टीम सगरमाथा पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (एसपीसीसी) के लिए काम करती है, जो एवरेस्ट पर कैंप 2 तक मार्ग सुरक्षित करने की जिम्मेदारी संभालती है।

पर्वतारोहियों की टीम कैंप वन से करीब 600 मीटर नीचे
बेस कैंप समन्वयक छेरिंग तेनजिंग शेरपा का कहना है कि अब तक कृत्रिम रूप से इस बर्फ को पिघलाने का कोई प्रभावी तरीका नहीं मिल पाया है। अप्रैल के इस चरण तक आमतौर पर मार्ग कैंप 3 तक तैयार हो जाता है, लेकिन इस बार टीम अभी भी कैंप 1 से लगभग 600 मीटर नीचे फंसी हुई है।
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रिपोर्ट के अनुसार कई वर्षों से आइसफॉल डॉक्टर के रूप में काम कर रहे आंग सार्की शेरपा ने बताया कि उन्होंने 10 अप्रैल को इस अवरोध तक पहुंचकर स्थिति का आकलन किया था। नीचे की दरार यानी क्रेवास लगातार पिघल रही है और सेराक का निचला हिस्सा कमजोर पड़ चुका है। उन्होंने बताया कि टीम ने चार दिन तक दाएं-बाएं हर दिशा में संभावित रास्ता खोजा, लेकिन कोई सुरक्षित विकल्प नहीं मिला।

हेलीकॉप्टर से कैंप 2 पहुंचाने पर विचार
नेपाल का पर्यटन विभाग अब वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रहा है। विभाग के महानिदेशक रामकृष्ण लामिछाने ने बताया कि रस्सियां लगाने वाली टीम और उनके उपकरणों को हेलीकॉप्टर से सीधे कैंप 2 तक पहुंचाने की संभावना पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि इससे ऊंचाई वाले हिस्से का मार्ग फिलहाल खोला जा सकता है, जबकि नीचे जहां बर्फ अवरोध है, वहां स्थिति सुरक्षित होने तक इंतजार किया जाएगा। हालांकि अंतिम चढ़ाई के लिए कैंप 1 और कैंप 2 के बीच का मार्ग खुलना अनिवार्य है, इसलिए यह केवल अस्थायी समाधान माना जा रहा है।
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