इस्राइल में हमास के हमले के बाद सबसे अधिक चर्चा इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद की हो रही है। रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया है कि मोसाद इस हमले को भांपने में नाकाम रही। एजेंसी के पूर्व निदेशक एफ्रैंम हेलेवी ने कहा है कि सिस्टम को बहुत बड़ा झटका लगा है।
मोसाद को इसबार जरूर हमले की भनक तक नहीं लगी, लेकिन यह एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही बड़े-बड़े आतंकी थर्रा जाते हैं। दुनिया के नक्शे पर एक छोटे से देश की खुफिया एजेंसी जिसके नाम से आतंकी संगठन ही नहीं, उनके आका और हुक्मरान भी खौफ खाते हैं। वैसे तो दुनिया में अमेरिका, ब्रिटेन, भारत और रूस से लेकर चीन तक कई देशों में कईं खुफिया एजेंसियां हैं, जो बेहद शक्तिशाली और ताकतवर वाली मानी जाती हैं।
इनके गुप्तचरों की पहुंच पूरी दुनिया में होती है, लेकिन इनमें मोसाद का नाम बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता है, क्योंकि यह एजेंसी अपने मुल्क के दुश्मनों के खिलाफ एक किलिंग मशीन की तरह काम करती है। आइए जानते हैं क्या है मोसाद, किस मुल्क से है नाता, कैसे करती है काम और जानिए इसके बड़े ऑपरेशन के बारे में ...
इस्राइल की तीन खुफिया एजेंसियों में से एक
मोसाद इस्राइल की खुफिया एजेंसी है। वैश्विक स्तर पर मोसाद को गुप्त ऑपरेशंस को अंजाम देने में दुनिया की टॉप खुफिया एजेंसी माना जाता है। मोसाद अपने दुश्मनों को उनके ही देश में घुसकर चुन-चुनकर मारने के लिए जानी जाती है। आमतौर पर ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देना बेहद ही कठिन होता है, लेकिन मोसाद को ऐसे अभियानों में महारत हासिल है।
मोसाद अपना निशाना कभी नहीं चूकती है। क्योंकि अपना मिशन पूरा करने से पहले मोसाद के एजेंट अपने टारगेट को लेकर पूरी रिसर्च करते हैं। साथ ही मिशन को अंजाम देने के बाद की परिस्थितियों से निपटने का भी पूरा इंतजाम पहले से करके रखते हैं।
जानकारी के अनुसार, इस्राइल के तीन बड़े खुफिया संगठन अमन, शिन बेट और मोसाद हैं। इनमें से एक मोसाद के भी दो काउंटर टेररिज्म यूनिट हैं। पहली यूनिट है मेटसाडा जो दुश्मन पर हमला करती है। जबकि दूसरी किडोन है। इसका काम गुप्त ही रखा गया है। लेकिन मोटे तौर पर यह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। मेटसाडा की भी अपनी अलग यूनिट्स हैं।
मोसाद (सांकेतिक तस्वीर)
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मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट
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मोसाद के बड़े ऑपरेशन
2020 ईरानी परमाणु वैज्ञानिक का खात्मा! : नवंबर 2020 में ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम शीर्ष वैज्ञानिक ब्रिगेडियर जनरल मोहसिन फखरीजादेह की हत्या कर दी गई है। हालांकि, मोसाद ने तब इसकी जिम्मेदारी खुले तौर पर नहीं ली, लेकिन जून 2021 में मोसाद के मुखिया ने इसे लेकर अहम खुलासे किए थे।
1976 का ऑपरेशन थंडरबोल्ट : अरब के आतंकियों द्वारा हाइजैक फ्रांसीसी विमान को मोसाद अपने 94 नागरिकों के साथ युगांडा से मुक्त कराकर लाई थी। यह ऑपरेशन काफी चर्चित रहा था।
1972 रैथ ऑफ गॉड (Wrath of God) : 1972 में म्यूनिख ओलिंपिक के लिए एकत्र इस्राइली ओलिंपिक टीम के 11 खिलाड़ियों की बंधक बनाकर हत्या का बदला फलस्तीनी आतंकियों से लिया। यह ऑपरेशन करीब 20 सालों तक चला और मोसाद ने सभी आतंकियों से चुन-चुनकर बदला लिया।
1964 में रूसी मिग-29 को इस्राइल लाना : उस दौर में सोवियत संघ रूस का मिग-29 सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता था। इसे पाने में जब अमेरिका की सीआईए भी विफल रही तो फिर मोसाद की महिला एजेंट ने 1964 में इसे कर दिखाया। हालांकि, 1962 में इसी मिशन पर एक मोसाद एजेंट पकड़ा गया था, जिसे फांसी दे दी गई थी।
1960 अर्जेंटीना में सीक्रेट मिशन : मोसाद ने अर्जेंटीना में 1960 में एक सीक्रेट मिशन को अंजाम देते हुए नाजी युद्ध के अपराधी एडोल्फ एकमैन को गुपचुप तरीके से अपहरण करके इस्राइल ले आई। बाद में मुकदमा चलाकर उसे सजा दी गई। इस मिशन को पांच एजेंट्स ने पूरा किया था।
- मोसाद ने अमेरिका के लिए ईरान में घुस कर अलकायदा के नंबर दो आतंकी अल मसरी को मार गिराया। फिर ईरान में घुस कर आतंकी अबु मोहम्मद का भी खात्मा किया।
- फलस्तीनी नेता यासिर अराफात के राइट हैंड खलील अल वजीर उर्फ अबू जिहाद को ट्यूनिशिया में टूरिस्ट बनकर गए मोसाद के एजेंट ने परिवार के सामने ही 70 गोलियां मारी थीं।
- अपने ही देश के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी लीक करने वाले बागी वैज्ञानिक वनुनु को पकड़ने के लिए मोसाद ने अपनी कातिल जांबाज हसीनाओं का इस्तेमाल किया और उसे प्रेम जाल में फंसाकर वापस इस्राइल ले आई।