रूस की राजधानी मॉस्को, जो आमतौर पर ठंडी और बादलों वाली रहती है, वहां शनिवार को रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। स्थानीय मीडिया ने बालचुक स्थित मौसम ब्यूरो के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि शनिवार को मॉस्को में पिछले 122 वर्षों का गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया। उन्होंने कहा, '1903 में तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन शनिवार को दोपहर 1 बजे यह बढ़कर 34.6 डिग्री हो गया।' हालांकि, उसी समय मॉस्को नदी के दूसरी ओर क्रेमलिन के पास एक स्वचालित मौसम केंद्र ने 36 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया।
2010 में मॉस्को में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जिससे पीट बोग के जंगलों में आग लग गई थी और पूरा शहर व उपनगर धुएं से भर गए थे। रूसी मौसम सेवा के अनुसार, शुक्रवार को मॉस्को में भीषण गर्मी पड़ी, जिसके चलते तापमान 35 डिग्री सेल्सियस (95 डिग्री फारेनहाइट) से ऊपर पहुंच गया। इसके चलते लगभग 30 साल पहले दर्ज किया गया नगरपालिका का रिकॉर्ड टूट गया।
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1996 में दर्ज किया गया था 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान
रूसी मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 1996 में मॉस्को में 33.4 डिग्री सेल्सियस (92 फारेनहाइट) तापमान दर्ज हुआ था। लेकिन यह रिकॉर्ड बृहस्पतिवार को तब टूट गया, जब शहर का तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस (93 फारेनहाइट) दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि दिन के दौरान एक नया रिकॉर्ड दर्ज होने की संभावना है, और तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
अगले हफ्ते की शुरुआत तक पड़ सकती भीषण गर्मी
रूसी मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि मध्य रूस और दक्षिणी यूरोप में भी अगले हफ्ते की शुरुआत तक भीषण गर्मी बनी रह सकती है और तापमान सामान्य से 3 से 8 डिग्री अधिक रहेगा। इस भीषण गर्मी की वजह से मॉस्को के लोग पार्कों, फव्वारों और अपने घरों के बाहर राहत पाने के लिए निकल पड़े। 86 वर्षीय वैलेंटिना अलेक्सांद्रोव्ना ने बताया, 'यह बहुत मुश्किल है, मैं दवाइयां ले रही हूं।' उन्होंने आगे कहा कि तापमान बहुत ज्यादा है, और मुझे याद नहीं कि मैंने कबी इतनी गर्मी का अनुभव किया हो।
तालाबों और नहरों में नहाने पहुंचे लोग
कुछ लोग गर्मी से राहत पाने के लिए तालाबों और नहरों में नहाने पहुंच गए, हालांकि वहां तैराकी पर प्रदूषण की चेतावनी के कारण रोक लगी हुई है। मॉस्को के उत्तर-पश्चिम में तुशिनो में डुबकी लगाने के बाद 55 वर्षीय इगोर ने कहा, 'पानी गंदा है, लेकिन यहां सांस लेना आसान लगता है।' वे क्रीमिया से मॉस्को घूमने आए थे।
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जीवाश्म ईंधन की वजय से जलवायु में हो रहा बदलाव
वैज्ञानिकों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि इंसानों द्वारा जलाए जा रहे जीवाश्म ईंधन की वजह से जलवायु में बदलाव हो रहा है, जिससे गर्मी और सूखा जैसी घटनाएं पहले से ज्यादा और बार-बार हो रही हैं। यूरोपीय संघ के जलवायु निगरानीकर्ता कोपरनिकस के अनुसार, पश्चिमी यूरोप ने इस साल अब तक का सबसे गर्म जून देखा है।