लचगर इस्लाम धर्म के खिलाफ काफी मुखर रही हैं और कई बार विवादों में फंस चुकी हैं। ईशनिंदा के आरोप में लचगर को पांच साल जेल और 20 हजार अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। साल 2022 में भी लचगर उस वक्त विवादों में फंसीं थीं।
मोरक्को की एक अदालत ने नारीवादी कार्यकर्ता इब्तिसाम लचगर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। लचगर पर ईशनिंदा करने के आरोप हैं। गौरतलब है कि लचगर कैंसर की समस्या से जूझ रही हैं और सितंबर में उनकी सर्जरी होनी है। इसके बावजूद मोरक्को की अदालत ने नारीवादी कार्यकर्ता को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया। इब्तिसाम लचगर का मामला इन दिनों मोरक्को समेत पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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विवादित तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का आरोप
इब्तिसाम लचगर के वकील ने बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान उन्हें स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर रिहा करने की मांग की थी, लेकिन राजधानी रबात की अदालत ने अपील ठुकरा दी और लचगर को रिहा करने से इनकार कर दिया। लचगर पर एक विवादित टिप्पणी वाली टीशर्ट पहनकर अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का आरोप है। मोरक्को में राजशाही और इस्लाम का अपमान करने की सख्त मनाही और इसे लेकर वहां लंबे समय से कठोर कानून हैं।
कैंसर से जूझ रही हैं लचगर
लचगर की वकील नईमा एलगुलाफ ने बताया कि लचगर कैंसर से जूझ रही हैं और जेल में उन्हें जरूरी देखभाल नहीं मिल पा रही है। वकील ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि लचगर की सितंबर में सर्जरी होनी है। सर्जरी में तय किया जाना है कि क्या लचगर अभी भी अपने कृत्रिम हाथ के साथ जी सकती हैं या फिर उसे हटाना पड़ेगा। जेल में लचगर की हालत लगातार बिगड़ रही है।
पहले भी विवादों में फंस चुकी हैं लचगर
लचगर इस्लाम धर्म के खिलाफ काफी मुखर रही हैं और कई बार विवादों में फंस चुकी हैं। ईशनिंदा के आरोप में लचगर को पांच साल जेल और 20 हजार अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। साल 2022 में भी लचगर उस वक्त विवादों में फंसीं थीं, जब उन्होंने कुरान का अपमान करने के लिए 32 वर्षीय ब्लॉगर को मिली पांच साल की सजा का विरोध किया था। लचगर (50 वर्षीय) एक मनोचिकित्सक हैं, साथ ही MALI नामक संगठन की सह-संस्थापक भी हैं। यह संगठन महिलाओं अधिकारों और समलैंगिक समुदाय के अधिकारों के लिए काफी मुखर रहता है।