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एकाधिकार : अमेरिका में खटाई में पड़ गया टेक कंपनियों पर लगाम कसने का मुद्दा?

Sat, 05 Jun 2021 07:41 PM IST
योगेश साहू डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला,  वॉशिंगटन।

सार

सदन में एंटीट्रस्ट संबंधी मामलों की समिति के प्रमुख डेमोक्रेटिक सदस्य डेविड सिसिलिन हैं। उन्होंने कुछ रिपब्लिकन सदस्यों के साथ मिलकर इस मामले में बिल तैयार करने की कोशिश की है। लेकिन जॉर्डन के कार्यालय ने आरोप लगाया है कि इस समिति ने अब तक ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किए हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : america US flag
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विस्तार
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बड़ी टेक कंपनियों की मोनोपॉली (एकाधिकार) रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का एजेंडा अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में गतिरोध का शिकार हो गया है। बताया जाता है कि ऐसा दोनों पार्टियों के बीच इसे लेकर मतभेद हैं। इस मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी के कॉकस में अंदरूनी मतभेद के भी संकेत हैं।

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वेबसाइट एक्सियोस डॉट कॉम के एक विश्लेषण में कहा गया है कि इन मतभेदों से ये उम्मीद टूट रही है कि इन कंपनियों पर एंटीट्रस्ट (एकाधिकार विरोधी) कानून के तहत कार्रवाई होगी। पहले ये धारणा थी कि दोनों पार्टियों को टेक कंपनियों से गहरी शिकायतें हैं। इसलिए इस मुद्दे पर आम राय से कार्रवाई का विधेयक पारित हो जाएगा। लेकिन अब खबर है कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की न्यायिक कमेटी के सदस्य प्रमुख रिपब्लिकन सांसदों में भी इस सवाल पर मतभेद उभर आया है। रिपब्लिकन सदस्य जिम जॉर्डन इस मामले में डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर कोई कदम उठाने के लिए तैयार नहीं हैं।

जॉर्डन ने कहा है कि वे बड़ी टेक कंपनियों को विभाजित करने के पक्ष में हैं। साथ ही वे धारा 230 में बदलाव के पक्ष में भी हैं। इसी धारा के तहत टेक कंपनियों को संरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने इसके लिए एक अलग प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें एंटीट्रस्ट नियमों को मजबूत बनाने का प्रावधान है। उनके प्रस्ताव के मुताबिक ये काम न्याय मंत्रालय के तहत आएगा। लेकिन जॉर्डन ने ये साफ नहीं किया है कि इसके लिए सदन में साझा प्रस्ताव को समर्थन देंगे।
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सदन में एंटीट्रस्ट संबंधी मामलों की समिति के प्रमुख डेमोक्रेटिक सदस्य डेविड सिसिलिन हैं। उन्होंने कुछ रिपब्लिकन सदस्यों के साथ मिलकर इस मामले में बिल तैयार करने की कोशिश की है। लेकिन जॉर्डन के कार्यालय ने आरोप लगाया है कि इस समिति ने अब तक ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किए हैं। 

रिपब्लिकन पार्टी के सूत्रों ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा है कि रिपब्लिकन पार्टी बिग टेक कंपनियों को विभाजित करना चाहती है। उसे शिकायत है कि ये कंपनियां कंजरवेटिव विचारों को दबाती हैं। लेकिन पार्टी को एंटीट्रस्ट के प्रति डेमोक्रेटिक पार्टी के नजरिए पर शक है। उन्होंने सवाल पूछा है कि क्या इस बात पर भरोसा किया जा सकता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी इंटरनेट पर कंजरवेटिव विचारों की सुरक्षा के लिए उत्साह दिखाएगी?

लेकिन हाउस की एंटीट्रस्ट कमेटी में रिपब्लिकन पार्टी के सांसद केन बक के कार्यालय ने कहा है कि बक डेमोक्रेट सदस्यों के साथ मिलकर द्विपक्षीय समाधान ढूंढने में जुटे हुए हैं। उनकी राय है कि टेक कंपनियों का एकाधिकार कायम करने संबंधी व्यवहार एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर दोनों पार्टियां मिलकर काम करती हैं। लेकिन खबरों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी में ऐसी राय रखने वाले सदस्य कम हैं। ज्यादातर यह मानते हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर कदम उठाने से उनके हितों की रक्षा नहीं होगी।

गौरतलब है कि हाउस और सीनेट दोनों की कमेटियां एक बिल तैयार में करने में जुटी हैं, जिसके जरिए फेसबुक, गूगल, एपल, ट्विटर आदि जैसी बड़ी तकनीक कंपनियों के लिए बुनियादी नियम तय किए जाएंगे। इस सिलसिले में इन कंपनियों के बड़े अधिकारियों से सीनेट और हाउस में कई बार पूछताछ हो चुकी है। लेकिन नियमों के स्वरूप के मामले में दोनों प्रमुख पार्टियों में मतभेद लगातार बने हुए हैं। अब खबर है कि अगर सहमति नहीं बनी, तो डेमोक्रेटिक पार्टी खुद हाउस में विधेयक पारित करेगी, जहां उसका बहुमत है। लेकिन बात सीनेट में आकर अटक जाएगी, जहां रिपब्लिकन पार्टी उसे रोकने की स्थिति में हैं।

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