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Monkeypox: दुनिया के 42 देशों में पैर पसार चुका मंकीपॉक्स, 'वैश्विक आपातकाल' पर डब्ल्यूएचओ करेगा फैसला

Thu, 23 Jun 2022 08:07 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

वैज्ञानिकों को संदेह है कि ऐसी किसी भी घोषणा से इस पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी क्योंकि इसके प्रकोप को दर्ज करने वाले विकसित देश पहले से ही इस पर काबू पाने के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना महामारी के बीच अब मंकीपॉक्स दुनियाभर के देशों में अपने पैर तेजी से पसारता जा रहा है। यह बीमारी अब 42 देशों में फैल चुकी है। वहीं इसके अबतक 3417 मामले सामने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसको लेकर अपनी आपातकालीन समिति की बैठक बुलाई है। मंकीपॉक्स के प्रकोप को  लेकर वैश्विक आपातकाल घोषित किया जाए या नहीं बैठक में इस पर विचार किया जा सकता है। 
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से मंकीपॉक्स को लेकर वैश्विक आपातकाल घोषित किए जाने का मतलब होगा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी इस प्रकोप को एक 'असाधारण घटना' मानती है और इसके अन्य देशों में भी  फैलने का खतरा बना हुआ है। 

डब्ल्यूएचओ का यह एलान दुनिया को मंकीपॉक्स के खिलाफ कोरोना महामारी और पोलियो उन्मूलन के लिए जारी प्रयासों के समान ही कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगा। 
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हालांकि वैज्ञानिकों को संदेह है कि ऐसी किसी भी घोषणा से इस पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी क्योंकि इसके प्रकोप को दर्ज करने वाले विकसित देश पहले से ही इस पर काबू पाने के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं। पिछले हफ्ते डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनाम घेब्रेयसस ने बताया था कि यह वायरस चालीस से अधिक देशों में पाया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि मध्य और पश्चिम अफ्रीका में दशकों तक मौजूद रहे इस वायरस का प्रकोप यूरोपीय मुल्कों में भी देखा जा रहा है। 

वहीं वैज्ञानिकों के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन, विश्व स्वास्थ्य नेटवर्क (डब्ल्यूएचएन) ने मंकीपॉक्स के प्रकोप को महामारी घोषित कर दिया है, जिसके बाद अब विश्व स्वास्थ्य संगठन के फैसले का इंतजार है। संक्रमण के मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट मंकीपॉक्स मीटर का हवाला देते हुए डब्ल्यूएचएन ने बताया कि अब तक 58 देशों में 3,336 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है और इसका प्रकोप तेजी से फैल रहा है। नेटवर्क ने इसे आपदा बनने से रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण व रोकथाम संगठनों से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।

गौर करने वाली बात यह है कि डब्ल्यूएचएन द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का एलान विश्व स्वास्थ्य संगठन की बृहस्पतिवार की बैठक से ठीक पहले सामने आया। नेटवर्क ने साफ कहा कि मंकीपॉक्स का प्रसार सिर्फ कुछ देशों या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इसके चलते जोखिम वाले देशों में व्यापक जांच और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग पर जोर दिया जाना चाहिए।
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