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West Asia Conflict: ट्रंप के दावों के बीच मोजतबा खामेनेई ने दिखाई आंख, बोले- मुआवजा दो या अंजाम भुगतो

Mon, 16 Mar 2026 09:50 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा, वरना अंजाम भुगतना पड़ेगा। वहीं विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ किया कि ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की और जरूरत पड़ने तक अपनी रक्षा जारी रखेगा।

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मोजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुई जंग अब आखिरी दौर में है। उनका कहना है कि ईरान के पास अब पलटवार करने की ताकत नहीं बची है। लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बयानों से ऐसा नहीं लगता। वे अमेरिका और इस्राइल के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।
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क्या बोले मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई ने देश को हुए नुकसान के लिए दुश्मन देशों से मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि हम दुश्मन से हर्जाना लेकर रहेंगे। अगर उसने इनकार किया, तो हम उसकी उतनी संपत्ति जब्त कर लेंगे जितनी हम तय करेंगे। अगर यह भी मुमकिन नहीं हुआ, तो हम उसकी उतनी ही संपत्ति को तबाह कर देंगे। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने खामेनेई के टेलीग्राम पोस्ट के आधार पर यह जानकारी दी है। इससे पहले उन्होंने अपने संदेश में लगातार संघर्ष करने की बात कही थी।

एक लिखित संदेश में मोजतबा खामेनेई ने जंग में मारे गए लोगों का बदला लेने की कसम खाई है। उन्होंने साफ किया कि तेहरान अपने शहीदों के खून का बदला जरूर लेगा। ईरानी सरकारी टीवी पर एक महिला एंकर ने उनका यह संदेश पढ़ा। संदेश के अनुसार, ईरान जरूरत पड़ने पर दूसरे मोर्चे भी खोल सकता है। ईरान अपने पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते चाहता है। वह सिर्फ उन्हीं ठिकानों पर हमला करेगा जहां से उस पर हमले किए जाते हैं।
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रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने क्या दावा
दूसरी तरफ, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं। अमेरिकी हमलों की वजह से उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हेगसेथ के मुताबिक, लगातार सैन्य अभियानों से ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ रहा है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
बता दें कि 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई, बड़े सैन्य कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था।

क्या बोले ईरानी के विदेश मंत्री
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम या वार्ता की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान ने कभी जंग रोकने की कोशिश नहीं की। हम तब तक अपनी रक्षा करेंगे जब तक जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि ईरान का सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ट्रंप को यह समझ नहीं आता कि यह एक अवैध युद्ध है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य क्या बोले ईरानी के विदेश मंत्री
अराघची ने कहा कि अमेरिका से बात करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि जब उन्होंने हमला किया, तब बातचीत चल रही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में उन्होंने कहा कि ईरान ने यह रास्ता बंद नहीं किया है। सेना तय करती है कि किन जहाजों को वहां से गुजरने देना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की। हमले से पहले ईरान यूरेनियम कम करने पर राजी था, लेकिन अब वह सामग्री मलबे में दब गई है। फिलहाल उसे निकालने की कोई योजना नहीं है।

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