पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हिंसक भीड़ ने शनिवार को एक पुलिस थाने पर हमला करने के बाद ईशनिंदा के आरोपी एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भीड़ ने लाहौर से करीब अस्सी किलोमीटर दूर वारबर्टन, ननकाना साहिब में पुलिस स्टेशन पर धावा बोला और आरोपी वारिस इसा को अपने कब्जे में ले लिया। भीड़ ने उसे निर्वस्त्र किया और उसे सड़क पर घसीटा। इसके बाद उसे पीट-पीटकर मार डाला।
स्थानीय मीडिया की खबर के मुताबिक, इलाके के वाशिंदों ने दावा किया कि दो साल जेल में बिताने के बाद घर लौटा व्यक्ति पवित्र पुस्तकों पर अपनी पूर्व पत्नी की तस्वीर चिपकाकर जादू-टोना करता था। घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में भीड़ को पुलिस स्टेशन के बड़े गेट पर चढ़ते हुए देखा जा सकता है। इस भीड़ में बच्चे में बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि पुलिस हिंसक भीड़ को रोकने में क्यों विफल रही। उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक को जिले में कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
शरीफ ने कहा, कानून का शासन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। किसी को भी कानून को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार संस्थानोंकी पहली प्राथमिकता शांति है और यह हमेशा पहले आनी चाहिए। पंजाब के आईजीपी उस्मान अनवर ने ननकाना सर्कल के डीएसपी नवाज विर्क और वारबर्टन के एसएचओ फिरोज भट्टी को सेवा से निलंबित कर दिया।
आईजीपी ने डीआईजी अमीन बुखारी और राजा फैसल को मौके पर पहुंचने और जिम्मेदारों और लापरवाही के दोषियों की पहचान करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया। आईजीपी ने एक बयान में कहा, 'किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं है, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, इसलिए घटना के लिए जिम्मेदार लोगों और लापरवाही और पेशेवर कदाचार के अपराधियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'
दिसंबर 2021 में पंजाब के सियालकोट शहर में भीड़ ने एक स्थानीय कारखाने में प्रबंधक के रूप में काम करने वाले श्रीलंकाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उसे मार डाला था। इस घटना की व्यापक निंदा हुई थी। लाहौर की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने श्रीलंकाई नागरिक पिरयांथा कुमारा की पीट-पीटकर हत्या के मामले में शामिल 88 संदिग्धों को सजा सुनाई थी। उनमें से छह को मौत की सजा सुनाई गई थी।