अमेरिका ने रूस को यूक्रेन पर हमला न करने की चेतावनी दी है और दोनों देशों से अनुरोध किया है कि पूर्वी यूक्रेन में रूसी वक्ताओं की ओर से अलगाववादी युद्ध को समाप्त करने के लिए बनाए गए समझौतों पर वापस लौटें। ये समझौते मिंस्क में किए गए थे इसलिए इन्हें मिंस्क समझौते भी कहा जाता है। इनमें से एक पर 2014 में और दूसरे पर 2015 में हस्ताक्षर किए गए थे।
यूक्रेन और रूस समर्थित अलगाववादी साल 2014 में बेलारूस की राजधानी मिंस्क में एक 12 बिंदु वाले संघर्ष विराम समझौते पर सहमत हुए थे। इसके प्रावधानों में कैदी हस्तांतरण, मानवीय मदद उपलब्ध कराना और भारी हथियारों की वापसी शामिल थे। लेकिन इस समझौते का दोनों ही पक्षों की ओर से जल्द ही उल्लंघन देखने को मिला था।
अगले साल हुआ दूसरा समझौता
इसके बाद फरवरी 2015 में रूस, यूक्रेन ऑर्गेनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप (ओसीएसई) के प्रतिनिधि और रूस समर्थित दो अलगाववादी क्षेत्रों के नेता मिले थे। यहां 13 बिंदुओं वाले एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके साथ ही मिंस्क में फ्रांस, जर्मनी, रूस और यूक्रेन के नेता समझौते के लिए सहयोग की घोषणा के लिए एकत्र हुए थे।
इसमें सैन्य और राजनीतिक कदम निर्धारित किए गए थे जो अभी तक लागू नहीं हुए हैं। इसमें एक बड़ी रुकावट रूस का रुख रहा है कि वह संघर्ष का पक्ष नहीं है और इसलिए शर्तों से बाध्य नहीं है। उदाहरण के तौर पर समझौते का 10वां बिंदु यह कहता है कि विवादित क्षेत्रों डोनेत्स्क और लुहांस्क से सभी विदेशी सशस्त्र संरचनाओं और सैन्य उपकरणों को वापस लिया जाए।