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भारत-चीन एलएसी विवाद पर अमेरिका बोला- समझौते से ड्रैगन अपना रुख बदलने वाला नहीं

Sat, 10 Oct 2020 10:34 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, वाशिंगटन
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अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो - फोटो : ANI
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लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र में भारत और चीन के बीच इस साल मई महीने से ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर तनाव चल रहा है। इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने कहा कि भारत से लगती एलएसी पर ताकत के बल पर नियंत्रण करने की चीन की कोशिश उसकी विस्तारवादी आक्रामकता का हिस्सा है ।अब यह स्वीकार करने का समय आ गया है कि बातचीत और समझौते से चीन अपना आक्रामक रुख नहीं बदलने वाला है।

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गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच इस गतिरोध को सुलझाने के लिए उच्च स्तरीय राजनयिक और सैन्य वार्ताओं का दौर चल रहा है, लेकिन अब तक इस समस्या का समाधान नहीं निकला है। सोमवार (12 अक्तूबर) को एक और बातचीत का दौर निर्धारित है, लेकिन चीन तनाव बढ़ाने से पहले अपने पुरानी जगह पर वापस जाने से हिचक रहा है।


अमेरिकी एनएसए रॉबर्ट ओ ब्रायन ने इस हफ्ते की शुरुआत में यूटा में चीन पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'सीसीपी (चीन की कम्युनिस्ट पार्टी) का भारत के साथ लगती सीमा पर विस्तारवादी आक्रमकता स्पष्ट है जहां पर चीन ताकत के बल पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है।'
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वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि चीन ने भारत से लगती उत्तरी सीमा पर 60 हजार सैनिक तैनात किए हैं। पोम्पियो ने सीमा पर तनाव को लेकर चीन के व्यवहार पर उसे फटकार लगाई और कहा कि बीजिंग क्वाड देशों के लिए खतरा बन गया है। 

हिंद-प्रशांत देशों के विदेश मंत्रियों को क्वाड समूह के रूप में जाना जाता है। क्वाड देशों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल है। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को जापान की राजधानी टोक्यो में मुलाकात की। कोरोना वायरस महामारी के शुरू होने के बाद यह विदेश मंत्रियों की पहली मुलाकात थी। विदेश मंत्रियों की यह बैठक हिंद-प्रशांत, दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक सैन्य रवैये और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के साथ तनाव के बीच हुई।


                                           


टोक्यो में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षों के साथ दूसरी क्वाड बैठक में भाग लेने के बाद पोम्पियो अमेरिका लौटे। शुक्रवार को 'द गाइ बेन्सन शो' के एक साक्षात्कार में पोम्पियो ने बताया कि भारतीय सेना उत्तरी सीमा पर 60 हजार चीनी जवानों की तैनाती को देख रही है। 

यह भी पढ़ें: ताइवान की 'ड्रैगन' को खरी-खरी, कहा- 'भाड़ में जाओ', हम भारत को दोस्त मानते हैं

उन्होंने कहा, मैं भारत, ऑस्ट्रेलिया, और जापान के अपने समकक्षों के साथ था। मैं क्वाड की बैठक में भाग लेने गया था। यह एक ऐसा प्रारूप है, जिसमें बड़े लोकतंत्र और शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं वाले चार देश शामिल हैं। इनमें से हर एक देश को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा खतरे का अंदेशा है। 

पोम्पियो ने कहा कि भारत का हिमालय में चीनी सेना के साथ आमना-सामना हुआ, जहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प भी हुई। चीन ने अब भारत के साथ लगने वाली सीमा पर बड़ी संख्या में जवानों को तैनात करना शुरू कर दिया है। चीनी सेना की तरफ से 60 हजार जवानों को सीमा पर तैनात किया गया है। 
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उन्होंने कहा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी सभी के लिए खतरा है। जब ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि चीन को वुहान से आए कोरोना वायरस को लेकर जांच करनी चाहिए, तो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने उसे धमकाया और डराने की कोशिश की।  

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