छठा दिन: अमेरिका-इस्राइल ने तेज किए हमले
छठे दिन अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार 72 घंटे में सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला हुआ। इस्राइल का दावा था कि ईरान के लगभग 80 प्रतिशत एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं। ईरान के मुताबिक देशभर में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी।
सातवां दिन: कई मोर्चों पर लड़ाई
सातवें दिन संघर्ष लेबनान-सीरिया सीमा और इराक तक फैल गया। अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर रॉकेट और ड्रोन हमले किए गए। दुबई और बहरीन में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की।
आठवां दिन: भारी बमबारी
आठवें दिन इजरायल ने लगभग 80 लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। तेहरान में कई धमाके हुए और मेहराबाद एयरपोर्ट पर आग लगने की खबर आई। सऊदी अरब ने बताया कि उसने शायबह तेल क्षेत्र की ओर आ रहे 16 ड्रोन मार गिराए।
नौवां दिन: नागरिक इलाकों पर असर
नौवें दिन मिसाइल हमलों में नागरिक इलाकों को भी नुकसान हुआ। बहरीन के एक समुद्री पानी शोधन संयंत्र पर हमला हुआ, जिससे पानी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। सऊदी अरब में एक रिहायशी परिसर पर हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।
दसवां दिन: ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर
दसवें दिन ईरान ने अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया। उधर अमेरिका ने बताया कि सऊदी अरब में ईरानी हमले में घायल एक सैनिक की मौत हो गई, जिससे युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या सात हो गई। तनाव बढ़ने के कारण अमेरिका ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से अपने गैर-जरूरी राजनयिक कर्मचारियों को हटाना भी शुरू कर दिया।
इसका वैश्विक असर
इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर दिखाई देने लगा है।
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तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं है।
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प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।
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होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला व्यापार धीमा पड़ गया है।