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पश्चिम एशिया संकट के 10 दिन: हमलों से तबाही जारी; कैसे बढ़ता गया संघर्ष, किस दिन क्या हुआ, जानिए सबकुछ

Mon, 09 Mar 2026 11:43 AM IST
Riya Dubey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गया। शुरुआत में अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए, जिसके बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया। आइए पूरे घटनाक्रम पर नजर डालते हैं।
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष - फोटो : PTI
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष ने कुछ ही दिनों में लेबनान, खाड़ी देशों और वैश्विक ऊर्जा बाजारों तक असर डाल दिया। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं और प्राकृतिक गैस आपूर्ति भी प्रभावित हुई।

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नीचे समझिए 10 दिनों में यह युद्ध कैसे आगे बढ़ा।

पहला दिन: अमेरिका-इस्राइल का बड़ा हमला

28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और रणनीतिक संस्थानों पर बड़ा संयुक्त हमला किया। तेहरान, इस्फहान और केरमानशाह सहित कई शहर निशाने पर रहे। सबसे बड़ा घटनाक्रम ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत रही। बताया गया कि इस्राइल की ब्लू स्पैरो मिसाइल उनके सुरक्षित परिसर पर गिरी, जिससे 86 वर्षीय नेता और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने तुरंत मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए।

दूसरा दिन: ईरान की जोरदार जवाबी कार्रवाई

दूसरे दिन ईरान ने इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन की कई लहरें दागीं। कुछ मिसाइलें इंफ्रास्ट्रक्चर पर गिरीं, हालांकि कई को इजरायल की एयर डिफेंस ने रोक लिया। इसी दौरान अमेरिका ने भी ईरान के मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए।

तीसरा दिन: हिजबुल्ला ने खोला नया मोर्चा

तीसरे दिन लेबनान के संगठन हिजबुल्ला ने दक्षिण लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट दागे।
इसके जवाब में इस्राइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों और लेबनान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 200 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई।

चौथा दिन: खाड़ी देशों में तनाव

चौथे दिन युद्ध का असर खाड़ी देशों तक पहुंच गया। कुवैत, बहरीन, कतर और यूएई के ऊपर कई मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए। इसी दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर खतरा बढ़ गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी।

पांचवां दिन: समुद्र और खाड़ी में टकराव

पांचवें दिन एक बड़ा समुद्री घटनाक्रम सामने आया। श्रीलंका के दक्षिण में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाया, जिसमें 87 लोगों की मौत हुई। दुबई, बहरीन और सऊदी अरब में भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं हुईं, जिनमें एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई।

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छठा दिन: अमेरिका-इस्राइल ने तेज किए हमले

छठे दिन अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार 72 घंटे में सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला हुआ। इस्राइल का दावा था कि ईरान के लगभग 80 प्रतिशत एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं। ईरान के मुताबिक देशभर में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी।

सातवां दिन: कई मोर्चों पर लड़ाई

सातवें दिन संघर्ष लेबनान-सीरिया सीमा और इराक तक फैल गया। अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर रॉकेट और ड्रोन हमले किए गए। दुबई और बहरीन में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की।

आठवां दिन: भारी बमबारी

आठवें दिन इजरायल ने लगभग 80 लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। तेहरान में कई धमाके हुए और मेहराबाद एयरपोर्ट पर आग लगने की खबर आई। सऊदी अरब ने बताया कि उसने शायबह तेल क्षेत्र की ओर आ रहे 16 ड्रोन मार गिराए।

नौवां दिन: नागरिक इलाकों पर असर

नौवें दिन मिसाइल हमलों में नागरिक इलाकों को भी नुकसान हुआ। बहरीन के एक समुद्री पानी शोधन संयंत्र पर हमला हुआ, जिससे पानी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। सऊदी अरब में एक रिहायशी परिसर पर हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

दसवां दिन: ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर

दसवें दिन ईरान ने अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया। उधर अमेरिका ने बताया कि सऊदी अरब में ईरानी हमले में घायल एक सैनिक की मौत हो गई, जिससे युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या सात हो गई। तनाव बढ़ने के कारण अमेरिका ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से अपने गैर-जरूरी राजनयिक कर्मचारियों को हटाना भी शुरू कर दिया।

इसका वैश्विक असर

इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर दिखाई देने लगा है।

  • तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं है।

  • प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।

  • होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला व्यापार धीमा पड़ गया है।

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