संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने सोमवार को संकेत दिया कि वह अगले चार साल का दूसरा कार्यकाल नहीं मांगेंगी। माना जा रहा है कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की ओर से आलोचना के कारण बालेचेट ने यह चौंकाने वाली घोषणा की है। बाचेलेट ने पिछले महीने चीन का दौरा किया था जिसकी अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देशों आलोचना की थी।
बाचेलेट ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित मानवाधिकार परिषद के नए सत्र में अपने उद्घाटन भाषण के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह उनकी आखिरी टिप्पणी होगी।
अधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने पुष्टि करते हुए कहा कि इसका मतलब है कि चिली की पूर्व राष्ट्रपति बाचेलेट दूसरे चार साल के कार्यकाल की मांग नहीं करेंगी, उनका वर्तमान कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख को संयुक्त राष्ट्र महासचिव ही चुनते हैं। बाचेलेट ने पिछले महीने ही चीन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ बात की। हालांकि उन्होंने पश्चिमी शिनजियांग में अल्पसंख्यक मुस्लिमों के कथित मानवाधिकारों के हनन की आलोचना नहीं की थी। जिसके चलते अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने उनकी आलोचना की थी। मानवाधिकार संगठनों ने भी उनके चीन दौरे की आलोचना की थी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने हाल ही में बालेलेट के चीन दौरे का समर्थन किया था।
छह दिवसीय चीन दौरे को लेकर तब बाचेलेट ने कहा था कि ये यात्रा किसी जांच के लिए नहीं थी बल्कि वरिष्ठ चीनी नेताओं के समक्ष चिंताओं को उठाने का एक मौका था। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत दायित्वों को पूरा करने में चीन का समर्थन करने और अधिक नियमित संवाद का मार्ग प्रशस्त करने का भी ये मौका था।
अपने दौरे अंतिम दिन मिशेल ने वीडियो के जरिए संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इस यात्रा ने मुझे चीन की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने का मौका दिया है। इससे चीन के अधिकारियों को हमारी चिंताओं को बेहतर ढंग से समझाने और संभावित रूप से उन नीतियों पर पुनर्विचार करने का अवसर प्रदान किया जिसके बारे में हमें लगता है कि मानवाधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समूह की प्रमुख मिशेल बाचेलेट की शिनजियांग दौरे के साथ ही चीनी सरकार का सीक्रेट सामने आ गया था। इसमें अल्पसंख्यक उइगर समुदाय से जुड़ा पूरा डेटा था जो लीक हो गया था। इसमें चीन के शीर्ष अधिकारियों के भाषण भी थे जिसमें उइगरों को दबाने और दंडित करने की योजनाएं थीं। चीन उइगर समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का शोषण करने का आरोप झेल रहा है और इसके लिए वैश्विक स्तर पर इसकी निंदा हो रही है।
हालांकि, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार शिनजियांग में मानवाधिकारों के उल्लंघन संबंधी सभी खबरों को खारिज करती रही है।