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मेक्सिको में चुनाव: राष्ट्रपति एमलो की जारी है लोकप्रियता, फिर भी लगा झटका

Wed, 09 Jun 2021 04:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेक्सिको सिटी

सार

मेक्सिको सिटी स्थित इबरोअमेरिकन यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर जेनारो लोजानो के मुताबिक हालांकि मोरेना और उसके सहयोगी दलों का अभी भी संसद के निचले सदन में बहुमत होगा, लेकिन संविधान बदलने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत उन्हें नहीं मिला है...
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राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुएल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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मेक्सिको में बीते को रविवार को इतिहास के सबसे विस्तृत चुनाव के लिए मतदान हुआ था। इसलिए इसमें उसमें कोई हैरत नहीं कि नतीजा आने में तीन दिन लग गए। इन चुनावों को वामपंथी राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुएल लोपेज के कामकाज के लिए जनमत संग्रह समझा गया था, जिन्हें आम तौर पर उनके नाम पहले अक्षरों एएमएलओ यानी एमलो के नाम से जाना जाता है। एमलो ने एक दिसंबर 2018 सत्ता में आने के बाद देश में बड़े बदलाव किए हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था मे सरकारी दखल बढ़ाया है और जन कल्याण की कई नई योजनाएं लागू की हैं। इसलिए रविवार को हुए चुनाव में आने वाले जनादेश पर पूरे लैटिन अमेरिका, संयुक्त राज्य अमेरिका और बाकी दुनिया की नजर थी।

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मतदान लगभग 20 हजार सीटों को भरने के लिए हुआ। संसद के निचले सदन और सभी राज्यों के गवर्नरों के अलावा प्रांतीय असेंबलियों और नगर निकायों के चुनाव के लिए एक साथ वोट डाले गए। कोरोना महामारी के भय के बीच हुए इस चुनाव में 52 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। संसदीय चुनाव में एमलो की पार्टी मोरेना के नेतृत्व वाले गठबंधन को हलका झटका लगा। 500 सदस्यों वाले निचले सदन में उसके सदस्यों की संख्या अब 334 से घट कर 279 रह गई है। लेकिन 15 राज्यों के गवर्नरों के लिए हुए चुनाव में मोरेना को 9 राज्यों में खुद और दो राज्यों में अपने सहयोगी दलों के साथ जीत हासिल हुई। ज्यादातर प्रांतीय असेंबलियों में भी मोरेना पार्टी जीतने में सफल रही है।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस में लैटिन अमेरिका रिसर्च शाखा के प्रमुख मार्टिन कास्टेलानो ने लैटिन अमेरिका की प्रमुख वेबसाइट अमेरिकाज क्वाटर्ली से कहा कि इस चुनाव के बाद एमलो मेक्सिको में वैसे संस्थानिक बदलाव नहीं ला सकेंगे, जिसका वादा उन्होंने किया था। संसद में उनकी पार्टी के सदस्यों की संख्या घट जाने के कारण अब उन्हें विपक्ष को साथ लेकर चलना होगा। लेकिन अर्थव्यवस्था में सरकारी दखल जारी रहेगा, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है।
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मेक्सिको सिटी स्थित इबरोअमेरिकन यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर जेनारो लोजानो के मुताबिक हालांकि मोरेना और उसके सहयोगी दलों का अभी भी संसद के निचले सदन में बहुमत होगा, लेकिन संविधान बदलने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत उन्हें नहीं मिला है। दूसरी तरफ राज्यों में मोरेना पार्टी के पांव फैले हैं। ज्यादातर राज्यों में उसकी जीत हुई, लेकिन एमलो को बड़ा झटका राजधानी मेक्सिको सिटी में लगा, जहां उनकी पार्टी हार गई। जबकि मेक्सिको सिटी ही व्यक्तिगत रूप से एमलो का कार्यक्षेत्र रहा है। लोजानो के मुताबिक इसका मतलब यह है कि एमलो मध्य वर्ग का समर्थन खो रहे हैं।

मेक्सिको के अखबार एल यूनिवर्सल की स्तंभकार एना पाउला ने कहा है कि इस चुनाव के बाद एमलो की दो सहयोगी दलों पर निर्भरता बढ़ गई है। उनमें एक लेबर पार्टी है, जिसके नेता की पहले एमलो आलोचना करते रहे हैं। साथ ही अब उन्हें बड़े फैसले लेने के लिए ग्रीन पार्टी पर भी निर्भर रहना होगा। मेक्सिको के सेंटर फॉर इकॉनमिक रिसर्च एंड टीचिंग में एसोसिएट प्रोफेसर कार्लोस ब्रेवो रेगिडॉर ने अमेरिकाज क्वाटर्ली से कहा कि हालांकि एमलो अब मन-मुताबिक संविधान संशोधन नहीं कर पाएंगे, लेकिन गवर्नरों के चुनाव में उनकी पार्टी को स्पष्ट जीत मिली है। फिर संसद में भी उनके गठबंधन की सीटें भले कम हुई हों, उनकी अपनी मोरेना पार्टी की सीटें नहीं घटी हैं। यह देश में एमलो की जारी लोकप्रियता का संकेत है।

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