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एमसीसी आर्थिक मदद मामला: चीन और अमेरिका की प्रभाव जमाने की होड़ में रण-क्षेत्र बन गया है नेपाल

Sat, 26 Feb 2022 03:45 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

एमसीसी से 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद लेने के लिए नेपाल सरकार ने 2017 में समझौता किया था। लेकिन नेपाल में उसकी शर्तों पर भारी विरोध के कारण अब तक उस समझौते के अनुमोदन का प्रस्ताव नेपाली संसद में पारित नहीं हो सका है। अब एमसीसी ने संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 28 फरवरी की समयसीमा तय कर दी है...
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नेपाल में एमसीसी की मदद का विरोध - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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काठमांडू स्थित अमेरिकी राजदूत के प्रमुख विपक्षी दल नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली से बात करने के बाद उसी दिन ओली से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय जन संपर्क विभाग के मंत्री सोंग ताओ ने बातचीत की। इन दोनों वार्ताओं में मुद्दा अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) की आर्थिक मदद स्वीकार करने को लेकर नेपाल में चल रहा गतिरोध रहा।

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सोंग ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री ओली को फोन किया था। लेकिन इस बारे में खबर गुरुवार को आई। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा कि सोंग और ओली ने चीन और नेपाल के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावना पर बातचीत की। इस दौरान सोंग ने कहा कि ‘विकास का स्वतंत्र रास्ता अपनाने’ के लिए चीन हमेशा ही नेपाल की जनता का समर्थन करेगा। इस टिप्पणी को महत्त्वपूर्ण माना गया है।

2017 में हुआ था समझौता

एमसीसी से 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद लेने के लिए नेपाल सरकार ने 2017 में समझौता किया था। लेकिन नेपाल में उसकी शर्तों पर भारी विरोध के कारण अब तक उस समझौते के अनुमोदन का प्रस्ताव नेपाली संसद में पारित नहीं हो सका है। अब एमसीसी ने संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 28 फरवरी की समयसीमा तय कर दी है। इस बीच अमेरिका की तरफ से नेपाल को खुली चेतावनी दी गई है कि अगर उसने मदद स्वीकार नहीं की, तो अमेरिका उसके साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों पर पुनर्विचार करेगा।

प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार ने अनुमोदन प्रस्ताव संसद में पेश किया है। लेकिन नेपाली कांग्रेस क नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दो कम्युनिस्ट पार्टियों ने साफ कह दिया है कि वे इसके खिलाफ मतदान करेंगी। उनका कहना है कि एमसीसी करार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की चल रही होड़ का हिस्सा है। नेपाल को इस होड़ से अलग रहना चाहिए।

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नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के इस रुख वजह से सारा ध्यान यूएमएल पर टिक गया है। प्रधानमंत्री देउबा यूएमएल का समर्थन पाने की कोशिश में ओली से कई बार बातचीत कर चुके हैं। इसी बीच अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों ने भी उनसे बात की है।

चीन ने की अमेरिकी नीति की आलोचना

यूएमएल के बयान के मुताबिक चीनी मंत्री से बातचीत के दौरान ओली ने कहा कि यूएमएल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से अपनी वार्ताओं को बहुत अहमियत देती है। ये पार्टियां एक दूसरे के हितों और उनकी प्रमुख चिंताओं का समर्थन करती हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय ने भी बुधवार को एक बयान जारी किया था। उसमें नेपाल में अमेरिका की ‘जोर-जबर्दस्ती की कूटनीति’ की आलोचना की गई थी। उसके पहले 18 फरवरी को चीन ने एमसीसी के करार के अनुमोदन के लिए अमेरिका की तरफ से डाले जा रहे दबाव की आलोचना की थी।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन और अमेरिका की तरफ से एमसीसी की मदद के मुद्दे पर नेपाली नेताओं पर बढ़ाए गए दबाव से नेपाल सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। उसे अंदेशा है कि संसद में प्रस्ताव का जो भी हश्र हो, उसे एक न एक बड़ी ताकत की नाराजगी झेलनी पड़ेगी।

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