इंडोनेशिया के पश्चिम जावा प्रांत में शनिवार तड़के हुए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस हादसे में इंडोनेशियाई मरीन फोर्स के कई जवानों समेत कुल 42 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि अब तक 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
भूस्खलन पासिर लांगू गांव के पास माउंट बुरंगरांग की ढलानों पर हुआ, जहां मरीन जवान कठिन और पहाड़ी इलाके में प्रशिक्षण ले रहे थे। भारी बारिश के चलते अचानक हुए भूस्खलन में उनका शिविर मलबे में दब गया और आसपास स्थित करीब 34 घर भी इसकी चपेट में आ गए।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार राहत और बचाव अभियान बड़े स्तर पर जारी है। खोज अभियान में लगे कर्मियों की संख्या 500 से बढ़ाकर 2,100 कर दी गई है। बचावकर्मी अपने हाथों के अलावा जल पंप, ड्रोन और खुदाई मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटे हैं।
एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने बताया कि मृतकों में से 11 की पहचान हो चुकी है, जबकि छह शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने कहा कि मृतकों में चार मरीन जवान भी शामिल हैं। वे 23 सदस्यीय उस टीम का हिस्सा थे, जो इंडोनेशिया–पापुआ न्यू गिनी सीमा से जुड़े प्रशिक्षण में शामिल थी। बाकी जवानों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
अधिकारियों के अनुसार, लगातार दो रात की मूसलाधार बारिश ने ढलान को कमजोर कर दिया था, जिससे यह हादसा हुआ। प्रभावित इलाके तक भारी मशीनरी पहुंचाना मुश्किल साबित हो रहा है क्योंकि सड़कें संकरी हैं और जमीन अभी भी अस्थिर है। राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी ने बताया कि भूस्खलन का मलबा करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और कुछ स्थानों पर इसकी गहराई आठ मीटर तक है।
सुरक्षा के मद्देनज़र, हादसे के पास रहने वाले लगभग 230 लोगों को सरकारी राहत शिविरों में भेज दिया गया है। उल्लेखनीय है कि 17 हजार से अधिक द्वीपों वाले इंडोनेशिया में अक्टूबर से अप्रैल के बीच भारी बारिश के मौसम में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, क्योंकि बड़ी आबादी पहाड़ी और बाढ़ संभावित क्षेत्रों के आसपास रहती है।