भारतीय राजनीतिक नेतृत्व, राजनयिकों के प्रयास और अंतरराष्ट्रीय दबाव से ही पाकिस्तान में फलफूल रहे आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को अंतराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया जा सका। चीन में भारतीय दूतावास के उप मिशन प्रमुख ए विमल तो यही मानते हैं। उनके मुताबिक 2002 में जैश-ए-मोहम्मद पर 1267 के तहत कार्रवाई हुई थी, लेकिन इसका सरगना मौलाना मसूद अजहर बच गया। चीन के वीटो के कारण भी वह बचता रहा।
ए. विमल के अनुसार, भारत 2009 से मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कराने का प्रयास कर रहा था। भारत ने तर्क रखा कि कोई आतंकवादी संगठन बिना नेतृत्व कैसे चल सकता है? जैश-ए-मोहम्मद का नेतृत्व मौलाना मसूद अजहर के हाथ में है, इसके सबूत भी रखे। विमल मानते हैं पुलवामा आतंकी घटना के बाद ये प्रयास और तेज हुए। चीन में भारतीय राजनयिकों ने प्रयास किए। भारत-चीन के बढ़ते संबंध, क्षेत्रीय, द्विपक्षीय सहयोग, समझ ने इसमें भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण चीन ने भी आतंकवाद के विरुद्ध अपना रुख स्पष्ट किया और कामयाबी मिल गई।
वन बेल्ट, वन रोड के मुद्दे पर नहीं बदला भारत का रुख
चीन के वन बेल्ट, वन रोड को लेकर भारत की चिंताओं में कोई बदलाव नहीं आया है। चीन अब इसे बार्डर रोड इनीशिएटिव या बार्डर रोड फोरम का नाम दे रहा है। उसका तर्क है इसमें पड़ोसी देशों को सहयोग करना चाहिए। यह आपसी, क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, अर्थव्यवस्था को गति देने तथा समृद्धि बढ़ाने में सहायक होगी। भारतीय राजनयिक का कहना है भारत अपनी चिंताओं और मुद्दों पर कायम है।
गौरतलब है पाकिस्तान से लेकर अपनी सीमा तक चीन सड़क बना रहा है। यह सड़क पाक अधिकृत कश्मीर से अक्साई चिन होते हुए चीन तक जाएगी। पाक अधिकृत कश्मीर को भारत विवादित क्षेत्र मानता है। उसका मानना है चीन की परियोजना भारतीय संप्रभुता को प्रभावित कर रही है। भारत इस बारे में चीन से नाराजगी भी जता रहा है।