फेसबुक के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग सालाना ब्लॉग के जरिए अपने दर्द को साझा किया है। इस ब्लॉग में उन्होंने आत्मीयता की बात की है। उन्होंने लिखा कि इंटरनेट के द्वारा हमारे दायरे, संस्कृतियों और मौकों का विस्तार हुआ। लेकिन, इतने बड़े समुदाय के बीच रहने की कई चुनौतियां भी हैं। इससे हम आत्मीयता को तरस गए।
जब मैं एक छोटे कस्बे में पला-बढ़ा तो अपने लिए वक्त का एहसास किया लेकिन अब अरबों लोगों के बीच अपनी अलग भूमिका तलाशना मुश्किल होता है। मैं परिवार और दोस्तों को वक्त देना चाहता हूं।
हम सभी को अपने लिए वक्त निकालना होगा और इस दौरान हमें यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि हमारी शख्सियत क्या है। मुझे इसकी काफी जरूरत है, क्योंकि मेरी जिंदगी बहुत ज्यादा सार्वजनिक हो चुकी है। मुझे परिवार और दोस्तों के लिए वक्त चाहिए लेकिन मार्क जुकरबर्ग के तौर पर नहीं बल्कि एक इंसान के तौर पर। मुझे उम्मीद है कि यह बात हर व्यक्ति तक पहुंचेगी।
इस दशक में कुछ बेहद अहम सामाजिक ढांचे फिर से आत्मीयता का अहसास करवाने में हमारी मदद करेंगे। इस क्षेत्र में खोज को लेकर मैं बहुत ज्यादा उत्साहित हूं। अगले 5 साल में हमारा डिजिटल-सामाजिक माहौल बहुत अलग होगा, फिर से निजी बातचीत पर जोर बढ़ेगा। इससे छोटे-छोटे समुदाय बनाने में मदद मिलेगी जिनकी हम सभी को जरूरत है।"
इस दशक में साल दर साल चुनौतियों की बजाय लंबी अवधि पर फोकस करूंगा। इस बारे में समझने की कोशिश कर रहा हूं कि मुझे दुनिया से क्या उम्मीदें हैं, 2030 में मेरी जिंदगी कैसी होगी? तब तक मेरी बेटी मैक्स, हाईस्कूल में पढ़ रही होगी।
हमारे पास ऐसी तकनीक होगी कि किसी व्यक्ति के दूर होते हुए भी उसकी वास्तविक मौजूदगी का अहसास कर पाएंगे। वैज्ञानिक रिसर्च बहुत सी बीमारियों से बचाने और उनके इलाज में मददगार साबित होंगे, इससे हमारी जिंदगी ढाई साल बढ़ जाएगी।