फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने कहा है कि सोशल मीडिया फेसबुक पर फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट की निगरानी करना अकेले कंपनियों के बस की बात नहीं है। दुनियाभर की सरकारें इसमें सक्रिय भूमिका अदा कर सकती हैं। मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि सरकारों को हानिकारक कंटेंट, चुनाव से जुड़ी सामग्री, निजता और डेटा पोर्टेबिलिटी को लेकर नियम बनाने चाहिए और इन्हें लागू कराने की जिम्मेदारी रेगुलेटरों पर होनी चाहिए। जकरबर्ग ने यह राय वाशिंगटन पोस्ट में लिखे अपने आलेख में दी है।
फेसबुक पर आरोप लगता रहा है कि वह फेक न्यूज और हिंसक कंटेंट के प्रसार पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है। हलांकि फेसबुक ने कई बाद दावा किया कि वह इस दिशा में काम कर रही है।
लेकिन अब जकरबर्ग ने उपभोक्ताओं की निजता के मामले में यूरोपियन देशों के नियमों को बेहतर बताया है। उन्होंने कहा है कि अन्य देशों को भी यूरोप के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) कानून से सीख लेनी चाहिए। जकरबर्ग और इंटरनेट की अन्य कंपनियां अब तक सरकारों के ज्यादा दखल पर विरोध जताती रही हैं, लेकिन फेसबुक ने अब अपना रुख बदल लिया है।
जकरबर्ग का बयान न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च स्थित मस्जिद में हुए आतंकी हमले के दो हफ्ते बाद आया है। इस जघन्य हत्याकांड में 50 लोग मारे गए थे। हमलावर ने इस घटना का फेसबुक पर लाइव प्रसारण किया था। हालांकि बाद में फेसबुक ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था लेकिन तब तक यह वीडियो कई वीडियो प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जा चुका था।
जकबर्ग ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा, 'दुनियाभर के कानून निर्माता हमसे कहते हैं कि हमारे पास संवाद से जुड़ी बहुत बड़ी शक्ति है। मैं इससे सहमत भी हूं। इसलिए मैं चाहता हूं ऐसी स्वतंत्र इकाई हो जहां लोग हमारे फैसले पर अपील कर सकें। जहां यह तय किया जा सके कि क्या पोस्ट होना चाहिए और क्या हटा लिया जाना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि नए नियम सभी टेक कंपनियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। इससे हानिकारक कंटेंट को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैलने से रोकने में सहूलियत मिलेगी। जकरबर्ग ने कहा कि सभी टेक कंपनियों के लिए हर तिमाही में फाइनेंशियल आंकड़ों के साथ-साथ पारदर्शिता रिपोर्ट भी जारी करना अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए।