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अमेरिका-ईरान में सुलह के संकेत: रुबियो बोले-ट्रंप के पास खुले हैं अन्य विकल्प, नाटो सहयोगियों पर भी बरसे

Thu, 21 May 2026 11:02 PM IST
राकेश कुमार एजेंसी, मुंबई।

सार

अमेरिका इस समय ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन वह अपनी सैन्य ताकत दिखाने से भी पीछे नहीं हट रहा। इस पूरे मामले में जहां एक तरफ अमेरिका अपने पुराने यूरोपीय दोस्तों की चुप्पी से नाराज है, वहीं दूसरी तरफ वह भारत के साथ अपने कारोबारी और ऊर्जा रिश्तों को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मसले पर बहुत कुछ कहा है। खबर में जानिए...
 
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मार्को रुबियो, अमेरिकी विदेश मंत्री - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में अच्छे संकेत मिल रहे हैं। हालांकि उन्होंने ज्यादा खुश न होने की सलाह भी दी है। रुबियो के मुताबिक, अगर बातचीत फेल हुई तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास दूसरे रास्ते भी तैयार हैं। मियामी में पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन टकराव नहीं चाहता। वे हमेशा से एक अच्छा समझौता करना चाहते हैं।
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बातचीत में थोड़ी प्रगति, पर ईरान में बिखराव
अमेरिकी विदेश मंत्री ने माना कि ईरान के साथ संपर्कों में कुछ सुधार हुआ है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का राजनीतिक सिस्टम थोड़ा बिखरा हुआ है। रुबियो को उम्मीद है कि पाकिस्तान के अधिकारियों की आज होने वाली तेहरान यात्रा से इस बातचीत को और मदद मिलेगी। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी गारंटी की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर अपनी पुरानी चेतावनी फिर दोहराई है।

नाटो पर भड़के रुबियो, भारत से दोस्ती की बात
रुबियो ने अपने नाटो देशों पर जमकर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि यूरोप मानता है कि ईरान की मिसाइलें उन तक पहुंच सकती हैं। वे ईरान को खतरा भी मानते हैं। लेकिन जब ऐक्शन लेने की बात आती है, तो सब छिप जाते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप सहयोगियों के इस रवैये से बहुत दुखी हैं।
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दूसरी तरफ, रुबियो ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को एक महान साझेदार बताया। रुबियो ने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर तेल और गैस का उत्पादन कर रहा है। वे भारत को जितना हो सके उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं। अपनी भारत यात्रा के दौरान वे क्वाड देशों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। साथ ही वे वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति की भारत यात्रा को लेकर भी बातचीत करेंगे।

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डब्ल्यूएचओ पर भी साधा निशाना
आखिर में रुबियो ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोविड के समय इस संस्था ने चीन की कमियां छुपाईं और यह बुरी तरह फेल रही। कांगो-डीआरसी में फैले इबोला वायरस पर उन्होंने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता अमेरिका के लोगों को बचाना है। इसके लिए वहां से आने वाले लोगों पर रोक लगा दी गई है। दूसरी तरफ, अमेरिका वहां स्थानीय स्तर पर 50 नए क्लीनिकों को सीधे पैसा देने के लिए तैयार है।
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