माले में एक ‘गैराज’ में आग लगने से नौ भारतीयों समेत 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए हैं। इस इमारत की पहली मंजिल पर प्रवासी मजदूर रहते थे। भारतीय उच्चायोग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। समाचार मंच ‘सनऑनलाइन’ के अनुसार, आग देर रात करीब साढ़े 12 बजे मावियो मस्जिद के पास एम. निरूफेफी में लगी।
भारतीय उच्चायोग में कार्यरत कल्याण कार्यों के अधिकारी रामधीर सिंह ने बताया, 10 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इनमें से नौ लोग भारतीय नगारिक हैं। दो अन्य लोगों की नागरिकता का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इससे पहले भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट किया, माले में आग लगने की घटना के बारे में सुनकर दुखी हैं।
इस घटना में कई लोगों की जान चली गई और उनमें कथित तौर पर भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हम मालदीव के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं। ‘गैराज’ भूतल पर था और प्रवासी मजदूर पहली मंजिल पर रहते थे। मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल आग एवं बचाव सेवा ने बताया कि इमारत से 28 लोगों को निकाला गया है।
सात लोग मृत मिले, जबकि गंभीर रूप से झुलस गए दो लोगों को इंदिरा गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया। आग पर सुबह 4:34 बजे काबू पाया जा सका। बता दें, माले की आबादी 2.50 लाख है, जिसमें से आधे बांग्लादेश, भारत, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका से आए लोग हैं।
मालदीव सरकार के संपर्क में भारतीय उच्चायोग
मालदीव में भारतीय उच्चायोग ने माले में आग लगने की घटना पर शोक जताया है। उच्चायोग ने कहा कि हम लगातार मालदीव सरकार के संपर्क में बने हुए हैं। इस घटना पर मालदीव सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि पुलिस फिलहाल मृतकों की शिनाख्त करने में जुटी है। इस संबंध में आग प्रभावितों के लिए एक स्टेडियम में राहत और बचाव केंद्र बनाया गया है। पीड़ितों की मदद के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेशी कामगारों का मामला चर्चा में
मालदीव में बुरी परिस्थितियों में रह रहे विदेशी कामगारों का मामला इस घटना के बाद फिर से चर्चा में आया है। मालदीव के सियासी दलों ने कहा है कि विदेशी कामगारों को दयनीय हालात में रहना पड़ता है। इन कामगारों के हालात का मामला कोरोनाकाल में सबसे पहले सामने आया, जब स्थानीय लोगों की तुलना में विदेशी कामगारों में तीन गुना ज्यादा संक्रमण के मामले देखने में आए।