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निर्वासन से लौटे मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति नशीद की राजनीति में जबरदस्त वापसी

Mon, 08 Apr 2019 02:14 AM IST
गौरव द्विवेदी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद (फाइल)
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लंबे समय बाद निर्वासन से लौटे मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की पार्टी ने देश में हुए संसदीय चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है। नशीद की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) 87 सदस्यीय संसद में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल करने में कामयाब हुई है। शनिवार को मजलिस (संसद) के लिए मालदीव में मतदान हुआ था। देश लौटने के महज पांच महीने के भीतर नशीद और उनकी पार्टी ने राजनीति में जबरदस्त वापसी की है। यह पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन के बड़ा झटका माना जा रहा है। 

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चुनाव में यमीन की प्रोगेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) दहाई का आंकड़ा भी नहीं पार कर सकी। हालांकि, यमीन ने चुनाव नहीं लड़ा था। पार्टी को मिली ऐतिहासिक जीत के बाद राजधानी माले में समर्थकों को संबोधित करते हुए 51 वर्षीय नशीद ने कहा कि सुधार, सरकारी भ्रष्टाचार खत्म करना और देश में स्थायी सरकार देना उनकी पहली प्राथमिकता है। 

नशीद ने वादा किया कि वह उनकी पार्टी को मिले जनादेश का इस्तेमाल हिंद महासागर के इस द्वीप में स्थिरता और लोकतंत्र के नए युग की शुरुआत करने में करेंगे। हमारा सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य सरकार में शांति लाना है। नशीद के चिर प्रतिद्वंद्वी और निरंकुश पूर्व राष्ट्रपति यमीन को पांच साल के कार्यकाल के बाद सत्ता से बेदखल होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। जिसके बाद शनिवार का चुनाव जनमत का पहला परीक्षण था।
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नशीद के चुनाव लड़ने पर लगी थी रोक

यमीन मनी लॉन्ड्रिंग और गबन के आरोपों का सामना कर रहे हैं। संसदीय चुनाव में नशीद की पार्टी को मिली जीत के पीछे यमीन के कार्यकाल में हुए घपले, भ्रष्टाचार और उनकी सरकार का निरंकुश हो जाना मुख्य कारण है। पूर्व उपराष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पिछले साल सितंबर के राष्ट्रपति चुनाव में यमीन को हराकर अप्रत्याशित जीत हासिल की थी, जिसके बाद नशीद की देश वापसी संभव हो सकी। राष्ट्रपति रहते यमीन ने नशीद को चुनाव लड़ने से रोक दिया था।

नशीद को माना जाता है भारत का समर्थक

भारत और चीन के बीच नशीद को भारत का समर्थक माना जाता है। वहीं, यमीन हमेशा भारत के विरोधी चीन के पाले में खड़े दिखे। यमीन के राष्ट्रपति रहते मालदीव और भारत के रिश्तों खटास आ गई थी। नशीद भारत और चीन के बीच कोई दुराव नहीं होने की बात दोहराते हैं।

नशीद को ब्रिटेन ने दी शरण, फिर श्रीलंका गए

2015 में नशीद पर मालदीव की आतंकवाद निरोधी कानूनों के अंतर्गत कई आरोप लगाए गए थे। मालदीव में कई आरोपों का सामना करने वाले नशीद को 2016 में ब्रिटेन ने अपने यहां शरण भी दी। इसके बाद वह श्रीलंका में भी निर्वासन में थे।

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