रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण दक्षिण-पूर्ण एशिया में आर्थिक सुधार की उम्मीदों पर तगड़ा प्रहार हुआ है। हालांकि एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) के सदस्य देशों का रूस या यूक्रेन से सीधा आर्थिक संबंध सीमित ही रहा है, लेकिन इस युद्ध के कारण यूरोपियन यूनियन (ईयू) की अर्थव्यवस्था के बुरी तरह प्रभावित होने का असर इस क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है। यह असर व्यापार से लेकर पर्यटन तक पर है।
मलेशिया के मेयबैंक ने पिछले दिनों चेतावनी दी कि यूक्रेन युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंधों का खराब असर आसियान पर भी होगा। बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा- ‘यूरोप की अर्थव्यवस्था में गिरावट का प्रभाव आसियान के निर्यात, यहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, और आर्थिक वृद्धि दर पर महसूस किया जाएगा।’ मेयबैंक ने इस बात का जिक्र किया कि आसियान के कुल निर्यात का नौ फीसदी ईयू को जाता है। इसके अलावा यहां होने वाले कुल प्रत्यक्ष विदेश निवेश में ईयू का हिस्सा 11 फीसदी है।
यूरोप में मंदी!
सिंगापुर के विश्लेषकों चुआ हाक बिन और ली जू ये ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘हम यूरोप में मंदी की आशंका की वजह से बेहद चिंतित हैं।’ वित्तीय सेवा देने वाली कंपनी मॉर्गन स्टैनले एशिया ने अपने एक ताजा अनुमान इस क्षेत्र के लगभग सभी देशों के इस साल की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को एक फीसदी तक गिरा दिया है। उधर, डीबीएस ग्रुप होल्डिंग्स नाम की कंपनी ने भी कहा है कि यूक्रेन युद्ध के दूसरे क्षेत्रों पर होने वाला असर पसर कर दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंच जाएगा।
कई विशेषज्ञों ने कहा है कि युद्ध के खराब असर से दुनिया का कोई क्षेत्र नहीं बच पाएगा। जो अंदेशे आसियान देशों को लेकर जताए गए हैं, वह दक्षिण एशिया के देशों पर भी लागू होते हैं। इस क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी यूरो-जोन से जुड़ी हुई हैं। इसलिए सबसे ज्यादा ध्यान इस ओर टिक गया है कि यूक्रेन युद्ध से यूरोप की अर्थव्यवस्था किस हद तक प्रभावित होती है।
आर्थिक विकास दर से ऊंची मुद्रास्फीति दर
फ्रांस की एसेट मैनेजमेंट कंपनी अमुन्दी चेतावनी दे चुकी है कि यूरोप के स्टैगफ्लेशन में फंसने का पूरा अंदेशा है। स्टैगफ्लेशन उस स्थिति को कहा जाता है कि मुद्रास्फीति की दर आर्थिक विकास की दर से ज्यादा हो जाती है। अमुन्दी ने कहा- ‘हमारा अनुमान है कि यूरो-जोन में महंगाई की दर इस पूरे साल बहुत ऊंची रहेगी। खास कर ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की महंगाई पर ये बात लागू होती है।’
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने इस साल की यूरो-जोन की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान भी काफी घटा दिया है। रेटिंग एजेंसी फिच ने इसमें डेढ़ फीसदी की कटौती की है। फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन ने लिखा है- रूसी सप्लाई में रुकावट के कारण यूरोप में चीजें के अभाव और ऊर्जा की राशनिंग होने की वास्तविक आशंका है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था में गिरावट का असर एशिया के विभिन्न क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा। असल में इस क्षेत्र में भी महंगाई तेजी से बढ़ रही है। आशंका है कि आने वाले दिनों में इसकी कड़ी मार आम जन पर पड़ेगी।